INDC Network : सोनभद्र, उत्तर प्रदेश :- Dr. Anil Maurya के बयान से असंतुष्ट किसानों ने Sonbhadra में महापंचायत के दौरान प्रशासन से लिखित जवाब की मांग की और आंदोलन की चेतावनी दी
Uttar Pradesh के Sonbhadra जिले में संभावित भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण किसानों में असंतोष गहराता जा रहा है, जिसका असर हाल ही में आयोजित महापंचायत में साफ दिखाई दिया।
महापंचायत के दौरान क्षेत्रीय विधायक Dr. Anil Maurya किसानों के बीच पहुंचे और स्थिति को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि जमीन अधिग्रहण की खबर महज एक ‘अफवाह’ है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही जिलाधिकारी से मिलकर स्थिति स्पष्ट करेंगे।
लिखित जवाब की मांग पर अड़े किसान
हालांकि विधायक के इस मौखिक आश्वासन से किसान संतुष्ट नहीं हुए। किसानों ने सीधे सवाल उठाया कि यदि भूमि अधिग्रहण की खबर सिर्फ अफवाह है, तो प्रशासन द्वारा इसका लिखित खंडन क्यों नहीं जारी किया जा रहा।
किसानों का कहना है कि मौखिक बयान से उनकी चिंताएं दूर नहीं होंगी, जब तक प्रशासन आधिकारिक तौर पर लिखित रूप में स्थिति स्पष्ट नहीं करता। यह मांग महापंचायत में जोर-शोर से उठाई गई।
सवालों से असहज होकर सभा छोड़कर निकले विधायक
महापंचायत के दौरान किसानों द्वारा लगातार पूछे जा रहे तीखे सवालों से माहौल गरमाता गया। इसी बीच Dr. Anil Maurya असहज हो गए और अचानक नाराज होकर सभा को बीच में ही छोड़कर चले गए।
विधायक के इस रवैये से मौके पर मौजूद किसानों में भारी नाराजगी फैल गई। कई किसानों ने इसे उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता की कमी बताया।
24 मार्च से जारी है बेचैनी
बताया जा रहा है कि 24 मार्च से ही क्षेत्र में संभावित भूमि अधिग्रहण की खबर फैलने के बाद से लोहरा और आसपास के गांवों के किसान चिंतित हैं। इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए किसानों ने Sonbhadra Kisan Sangharsh Samiti का गठन किया है।
किसानों का आरोप है कि उन्होंने प्रशासन को लिखित ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। प्रशासन की चुप्पी ने उनकी आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।
आंदोलन की चेतावनी
महापंचायत के अंत में किसानों ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि प्रशासन जल्द ही लिखित रूप में स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तो वे बड़ा धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। किसानों ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
आगे क्या?
यह मामला अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और किसानों के अधिकारों से जुड़ा बड़ा प्रश्न बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल पाता है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थान | सोनभद्र |
| मुद्दा | संभावित भूमि अधिग्रहण |
| विधायक | डॉ. अनिल मौर्य |
| किसानों की मांग | लिखित स्पष्टीकरण |
| संगठन | किसान संघर्ष समिति |
| स्थिति | आंदोलन की चेतावनी |
सोनभद्र में भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रशासन की चुप्पी पर किसान भड़के, महापंचायत में विधायक के जवाब से असंतोष और आंदोलन की चेतावनी।



















