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तारिक रहमान के न्योते पर पाक एक्सपर्ट भड़के, बांग्लादेश घिरा विवादों में

INDC Network: बंगलादेश :-पीएम मोदी को शपथ न्योता भेजने पर पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रिया

बांग्लादेश के संभावित प्रधानमंत्री तारिक रहमान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किए जाने पर पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। पाकिस्तानी विश्लेषक कमर चीमा ने इस कदम को “कमजोर रुख” बताया और कहा कि बांग्लादेश को पहले अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए थी। इस मुद्दे ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

बांग्लादेश की राजनीति में एक नए घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया की कूटनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किए जाने के बाद पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।पाकिस्तानी राजनीतिक विश्लेषक कमर चीमा ने सार्वजनिक रूप से इस कदम की आलोचना करते हुए इसे बांग्लादेश की “कमजोर राजनीतिक स्थिति” का संकेत बताया। उनका कहना है कि जब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में मौजूद हैं, ऐसे में भारतीय प्रधानमंत्री को समारोह में आमंत्रित करना राजनीतिक रूप से गलत संदेश देता है।

पाकिस्तान में क्यों उठे सवाल?

कमर चीमा ने अपने बयान में कहा कि तारिक रहमान को शपथ ग्रहण के पहले ही दिन भारत के खिलाफ कड़ा बयान देना चाहिए था, जिससे बांग्लादेश की स्वतंत्र और सशक्त छवि सामने आती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत बांग्लादेश पर प्रभाव बनाए रखना चाहता है और इस निमंत्रण से वही धारणा मजबूत होती है।हालांकि, बांग्लादेश की ओर से इस निमंत्रण को सामान्य कूटनीतिक परंपरा का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें पड़ोसी देशों के प्रमुख नेताओं को शपथ समारोह में आमंत्रित किया जाता है।

शेख हसीना का मुद्दा

पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने अपने बयान में शेख हसीना के भारत में होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश अपनी पूर्व प्रधानमंत्री को वापस नहीं ला पा रहा है, तो उसे पहले इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था।हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों और कानूनी प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक टिप्पणी करना संवेदनशील विषय होता है। बांग्लादेश सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और सीमा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में कई समझौते हुए हैं। ऐसे में शपथ ग्रहण समारोह में निमंत्रण को द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य विस्तार के रूप में भी देखा जा सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया की राजनीति में पड़ोसी देशों के बीच संतुलन बनाए रखना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक, राजनीतिक और सामरिक समीकरण जटिल रहे हैं।

क्षेत्रीय राजनीति पर असर

इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय कूटनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर इसे बांग्लादेश की स्वतंत्र विदेश नीति का हिस्सा माना जा रहा है, तो दूसरी ओर पाकिस्तान में इसे रणनीतिक चूक के रूप में पेश किया जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी शपथ ग्रहण समारोह में पड़ोसी देशों को आमंत्रित करना सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है। इसे घरेलू राजनीति से जोड़कर देखना क्षेत्रीय संबंधों को अनावश्यक रूप से तनावपूर्ण बना सकता है।

आगे क्या?

अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समारोह में शामिल होंगे और इस मुलाकात से भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई दिशा मिलेगी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि पाकिस्तान की आलोचनाओं का बांग्लादेश की राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ता है।दक्षिण एशिया की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में यह घटनाक्रम आने वाले समय में कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

क्रमांकबिंदुविवरण
1घटनापीएम मोदी को शपथ ग्रहण समारोह का न्योता
2संबंधित नेतातारिक रहमान (BNP प्रमुख)
3प्रतिक्रियापाक एक्सपर्ट कमर चीमा की आलोचना
4मुद्दाशेख हसीना की भारत में मौजूदगी
5संभावित प्रभावक्षेत्रीय कूटनीति में नई बहस
6संदर्भभारत-बांग्लादेश रणनीतिक संबंध

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