INDC Network: फर्रुखाबाद, भारत:- फर्रुखाबाद के निजामुद्दीनपुर में रिश्तों से बढ़कर इंसानियत की अनोखी कहानी
फर्रुखाबाद के कायमगंज ब्लॉक स्थित निजामुद्दीनपुर गांव में देवरानी ने अपने गंभीर रूप से बीमार जेठ को लीवर का हिस्सा दान कर उनकी जान बचाई। दिल्ली के निजी अस्पताल में सफल ट्रांसप्लांट के बाद दोनों की हालत स्थिर है। यह घटना क्षेत्र में इंसानियत और पारिवारिक मूल्यों की मिसाल बन गई है।
रिश्तों से बढ़कर निकला मानवता का भाव
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज ब्लॉक अंतर्गत निजामुद्दीनपुर गांव से एक भावुक और प्रेरणादायक मामला सामने आया है। जहां एक देवरानी ने अपने जेठ को नया जीवन देने के लिए अपने लीवर का हिस्सा दान कर दिया। ऐसे समय में जब रिश्तों में दूरियां और स्वार्थ की खबरें अधिक सुनने को मिलती हैं, यह घटना मानवता और पारिवारिक मूल्यों की मिसाल बनकर उभरी है।गांव निवासी अकबर पिछले करीब आठ महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। लगातार तबीयत बिगड़ने के बाद जब चिकित्सकीय जांच कराई गई तो डॉक्टरों ने उनके लीवर के गंभीर रूप से खराब होने की पुष्टि की। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी जान बचाने का एकमात्र विकल्प लीवर ट्रांसप्लांट है।
बीमारी के दौरान मिला बड़ा झटका
परिवार के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी। आर्थिक और मानसिक दबाव के बीच अकबर को एक और बड़ा झटका तब लगा जब उनकी पत्नी उन्हें गंभीर हालत में छोड़कर अपने 8 वर्षीय बेटे असरफ के साथ मायके चली गईं।परिवार के अन्य सदस्यों ने अकबर की देखभाल जारी रखी, लेकिन लीवर डोनर की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बन गई। परिवार और रिश्तेदारों के बीच कई लोगों की जांच कराई गई, मगर मेडिकल मानकों के अनुसार कोई उपयुक्त डोनर नहीं मिल सका।
निदा परवीन का साहसिक फैसला
इसी बीच अकबर के छोटे भाई अमजद की पत्नी, 29 वर्षीय निदा परवीन ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने पूरे परिवार को भावुक कर दिया। उन्होंने स्वेच्छा से अपने जेठ को लीवर का हिस्सा दान करने की इच्छा जताई।निदा ने कहा कि वह अपने जेठ को सगे भाई के समान मानती हैं और उनकी जान बचाना अपना कर्तव्य समझती हैं। परिवार ने पहले तो उनकी सेहत और भविष्य को ध्यान में रखते हुए चिंता जताई, लेकिन मेडिकल जांच में निदा लीवर डोनेशन के लिए पूरी तरह फिट पाई गईं।उनके इस निर्णय ने परिवार में उम्मीद की नई किरण जगा दी।
दिल्ली में सफल ट्रांसप्लांट
गुरुवार को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में लीवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की गई। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कई घंटों तक चली सर्जरी के बाद सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया।परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद निदा परवीन और अकबर दोनों की हालत स्थिर है और वे तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि समय पर डोनर मिल जाने से मरीज की जान बचाई जा सकी।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी घटना
निदा परवीन के इस त्याग और साहस की चर्चा अब पूरे कायमगंज क्षेत्र में हो रही है। गांव के लोग इसे रिश्तों और इंसानियत की एक बड़ी मिसाल मान रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के समय में जब कई बार परिवारिक मतभेद सामने आते हैं, ऐसे में एक बहू द्वारा अपने जेठ के लिए इतना बड़ा त्याग करना समाज के लिए प्रेरणादायक है।यह घटना न केवल पारिवारिक एकता का संदेश देती है, बल्कि अंगदान के महत्व को भी रेखांकित करती है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थान | निजामुद्दीनपुर, कायमगंज, फर्रुखाबाद |
| मरीज का नाम | अकबर |
| बीमारी | लीवर फेलियर |
| डोनर | निदा परवीन (देवरानी) |
| उम्र (डोनर) | 29 वर्ष |
| ऑपरेशन स्थान | दिल्ली का निजी अस्पताल |
| स्थिति | दोनों की हालत स्थिर |
सामाजिक संदेश
यह घटना बताती है कि सच्चे रिश्ते खून से नहीं, बल्कि विश्वास और त्याग से बनते हैं। निदा परवीन का यह कदम समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि लीवर एक ऐसा अंग है जो आंशिक रूप से दान करने के बाद भी पुनः विकसित हो सकता है, जिससे डोनर सामान्य जीवन जी सकता है। सही जानकारी और जागरूकता के अभाव में कई लोग अंगदान से हिचकते हैं।निदा की यह कहानी न केवल एक परिवार को नया जीवन देने की है, बल्कि समाज को मानवता का संदेश देने की भी हैफर्रुखाबाद के निजामुद्दीनपुर गांव में देवरानी निदा परवीन ने अपने जेठ अकबर को लीवर दान कर उनकी जान बचाई। दिल्ली में सफल ट्रांसप्लांट के बाद दोनों की हालत स्थिर है। यह घटना इंसानियत, त्याग और पारिवारिक मूल्यों की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।



















