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15 हजार करोड़ की लागत से चित्रकूट-प्रयागराज-वाराणसी को जोड़ेगा छह लेन हाईस्पीड कॉरिडोर

INDC Network : चित्रकूट, उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में जल्द ही एक बड़ा बुनियादी ढांचा बदलाव देखने को मिलेगा। चित्रकूट से प्रयागराज होते हुए वाराणसी तक 249 किलोमीटर लंबे छह लेन के हाईस्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की डिजाइन को मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जाएगी। सरकार ने इस प्रोजेक्ट की पहली किस्त के रूप में 10 करोड़ 37 लाख रुपये जारी कर दिए हैं।

सर्वे का काम जल्द शुरू होगा
इस परियोजना के सर्वे की जिम्मेदारी भोपाल की कंपनी एआईसीओएनएस इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है, जो अगले तीन महीनों में सर्वे का काम शुरू करेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग के क्षेत्रीय अधिकारी एस.के. आर्या ने जानकारी दी कि इस हाईस्पीड कॉरिडोर के जरिए चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी जैसे तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों को सीधा जोड़ा जाएगा।

पर्यटन और आर्थिक विकास में वृद्धि
परियोजना पूरी होने पर न सिर्फ पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि बुंदेलखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह मार्ग उच्च क्षमता वाले वाहनों के लिए सुरक्षित और तेज रहेगा, जिससे लंबी दूरी की यात्रा में समय की बचत होगी।

पिछले अनुभव से मिली प्रेरणा
महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में सड़क मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ा था, जो 10 से 20 किलोमीटर लंबा और कई बार 12 घंटे तक चलता था। इस छह लेन मार्ग के बनने से भविष्य में ऐसी परेशानियां काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।

धार्मिक स्थलों के बीच आसान यात्रा
हाईस्पीड कॉरिडोर के बन जाने पर लोग भगवान राम की नगरी चित्रकूट से भगवान शिव की नगरी वाराणसी और प्रयागराज तक आसानी से यात्रा कर सकेंगे। यह मार्ग गंगा और यमुना नदियों को जोड़ने के लिए विशेष लिंक रोड से भी लैस होगा।

सुरक्षित और तेज गति वाला मार्ग
दोनों दिशाओं में तीन-तीन लेन होंगी, और वाहनों का प्रवेश व निकास केवल निर्धारित टोल प्लाजा, इंटरचेंज या रैंप से होगा। इस मार्ग पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 100-120 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जिससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
चित्रकूट के जिलाधिकारी शिवशरणप्पा ने बताया कि हाईस्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के प्रस्ताव को मंजूरी मिलना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल पर्यटन और धार्मिक यात्रा को बढ़ावा देगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। सर्वे पूरा होते ही इस वर्ष कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

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