INDC Network : अयोध्या, उत्तर प्रदेश : अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है उनका एक ऐसा कदम जिसने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी है। महंत राजू दास ने रायबरेली में पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को थप्पड़ मारने वाले युवक को सम्मानित किया है। युवक को अंग वस्त्र भेंट कर हनुमानगढ़ी मंदिर की ओर से यह सम्मान प्रदान किया गया।
पूरा मामला रायबरेली का है, जहां स्वामी प्रसाद मौर्य एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान एक युवक ने पहले मौर्य को माला पहनाई और फिर अचानक थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना से वहां अफरा-तफरी मच गई और मौर्य समर्थकों ने युवक की पिटाई कर दी।
घटना के बाद मामला तब और तूल पकड़ गया जब कुछ दिन पहले एक टीवी डिबेट के दौरान महंत राजू दास और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। इसके बाद महंत ने सार्वजनिक रूप से थप्पड़ मारने वाले युवक का समर्थन किया और अब उसे सम्मानित भी कर दिया।
सम्मान समारोह के दौरान महंत राजू दास ने कहा, “भारत देश में कंकड़-कंकड़ में शंकर पाए जाते हैं। जिस देश में पेड़-पौधों में भी जीव का वास होता है, उस देश में सनातन और रामचरित मानस का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि जो लोग हिंदू धर्म के खिलाफ विवादित बयान देंगे, उन्हें थप्पड़ नहीं मारा जाएगा तो और क्या किया जाएगा।
महंत ने युवक, जिसका नाम रोहित बताया जा रहा है, को आशीर्वाद देते हुए उसके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि रोहित के समर्थन में आने वालों को भी वे आशीर्वाद देते हैं। महंत ने यह भी कहा कि धर्म की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने प्राणों की आहुति दी है और आज भी आवश्यकता पड़ने पर ऐसा किया जाएगा।
अपने भाषण में उन्होंने आरोप लगाया कि देश में मंदिर तोड़कर मस्जिदें बनाई गई हैं और अब कई मजारों और मस्जिदों में भगवान शंकर की प्रतिमाएं निकल रही हैं। उन्होंने इस मुद्दे को सनातन धर्म की रक्षा से जोड़ा और कहा कि ऐसे मामलों में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में गरमागरमी बढ़ गई है। कुछ लोग महंत के इस कदम को सही ठहराते हुए इसे धार्मिक अस्मिता की रक्षा बताते हैं, वहीं विरोधी दल इसे कानून और सामाजिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए आलोचना कर रहे हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से इस सम्मान समारोह पर अभी सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उनके समर्थक इसे निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बता रहे हैं।
अयोध्या जैसे धार्मिक महत्व वाले शहर में यह घटना खासतौर पर संवेदनशील मानी जा रही है। यह केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गई है, जिसमें आस्था, राजनीति और जनभावनाओं का मिश्रण देखने को मिल रहा है।
इस सम्मान के बाद यह साफ है कि महंत राजू दास आने वाले समय में भी अपने बेबाक बयानों और विवादित कदमों के लिए चर्चा में बने रहेंगे, और यह मुद्दा लंबे समय तक सियासी गलियारों में गूंजता रहेगा।























