INDC Network : फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में खाद की किल्लत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। धान, ज्वार, बाजरा, मक्का और गन्ने जैसी फसलों का मौसम चल रहा है, लेकिन किसानों को खाद के लिए घंटों लंबी लाइनों में लगने के बाद भी निराशा हाथ लग रही है। इससे नाराज किसानों ने फर्रुखाबाद जिला कार्यालय फतेहगढ़ पर आम आदमी पार्टी किसान प्रकोष्ठ के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन किया।
धरना प्रदर्शन की अगुवाई जिला अध्यक्ष इंजी नीरज प्रताप शाक्य ने की। इस मौके पर कई किसान नेताओं ने खाद की कमी और कालाबाजारी को लेकर प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
खाद माफिया और प्रशासन की मिलीभगत का आरोप
धरने में किसानों ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार खाद वितरण में पूरी तरह नाकाम है। किसानों का कहना था कि खाद की गोदामों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन प्रशासनिक मिलीभगत और खाद माफियाओं के कारण यह किसानों तक नहीं पहुंच रही। बड़े व्यापारी और गोदाम मालिक इस संकट का फायदा उठाकर कालाबाजारी कर रहे हैं।
किसान नेता नरेंद्र सिंह सोमवंशी ने कहा कि गोदाम खाद से भरे पड़े हैं, लेकिन किसानों को लाठियां और डंडे मिल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तुरंत खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई तो किसान एक-एक खाद वितरण केंद्र पर आंदोलन करेंगे और गोदामों का घेराव करेंगे।
नीरज प्रताप शाक्य ने सरकार को घेरा
धरना स्थल पर किसानों को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष इंजी नीरज प्रताप शाक्य ने कहा कि यह सरकार किसानों को सिर्फ आश्वासन दे रही है, लेकिन जमीन पर हकीकत अलग है। उन्होंने कहा: “किसानों को खाद न मिलना सरकार की घोर नाकामी है। यह सीधे-सीधे अन्नदाता की आजीविका पर हमला है। योगी सरकार उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने में लगी है, जबकि किसान दर-दर भटक रहे हैं। यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
ज्ञापन में रखी गई मांगें
आम आदमी पार्टी किसान प्रकोष्ठ ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। इसमें प्रमुख मांगें रखी गईं:
- किसानों को तत्काल पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए।
- खाद वितरण में भ्रष्टाचार और कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए।
- दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- मौजूदा मौसम की बोआई बाधित होने पर किसानों को विशेष राहत पैकेज दिया जाए।
- किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाए और खाद वितरण व्यवस्था पारदर्शी हो।
बाढ़ और खाद संकट से दोहरी मार
किसान नेता बबलू दीक्षित ने कहा कि किसान पहले से ही बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है। खेतों में पानी भरा है, फसलें नष्ट हो चुकी हैं, और ऊपर से खाद नहीं मिल पा रही। उन्होंने कहा कि समितियां किसानों को अनावश्यक चीजें जैसे कीटनाशक, जैविक खाद और जिप्सम थोप रही हैं, जबकि किसान इनकी खरीद नहीं कर पा रहा।
वरिष्ठ किसान नेता कमलेश राजपूत ने बताया कि 300 से ज्यादा गांवों में पानी भरा हुआ है। किसान गंगा की धाराओं को पार करके धरना स्थल पहुंचे। “जानवर भूखे हैं, परिवार बेहाल है, और सरकार खाद तक उपलब्ध नहीं करा पा रही। यह किसानों पर सीधा अत्याचार है।”
जनपद गोंडा में खाद की वजह से किसान लाइन लगाकर बारिश में खड़े :-
भ्रष्ट अधिकारियों को चेतावनी
अधिवक्ता प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष एडवोकेट जितेंद्र सिंह ने कहा कि खाद वितरण में प्रशासनिक भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अधिकारी अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं लाते तो किसान आंदोलन तेज होगा।
नारे और जोश से गूंजा धरना स्थल
धरना स्थल से लेकर जिला कार्यालय तक किसानों ने जोरदार नारेबाजी की।
“किसान एकता जिंदाबाद”, “जय जवान जय किसान”, “खाद माफिया मुर्दाबाद”, “इंकलाब जिंदाबाद” और “खाद न दे सके जो सरकार, वह सरकार निकम्मी है” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा। किसानों ने बैनर, झंडे और स्लोगन के कटआउट के साथ अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
आंदोलन की चेतावनी
किसान नेताओं ने कहा कि यदि जल्द ही खाद वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
- गोदामों और खाद केंद्रों का घेराव होगा।
- भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों का भंडाफोड़ किया जाएगा।
- कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाकर किसान संगठित आंदोलन करेंगे।
किसानों का साफ संदेश
धरना स्थल पर किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि अब वे चुप बैठने वाले नहीं हैं। किसानों की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों की आवाज सुने और खाद संकट का समाधान तत्काल किया जाए।

बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी
धरने में अवनीश सिंह तोमर, कैप्टन श्याम पाल सिंह, अमित राजपूत, नवीन कुमार शाक्य, जोगराम राजपूत सहित कई वरिष्ठ किसान नेता मौजूद रहे। युवा प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष राघवेंद्र यादव, आईटी सेल प्रभारी अंकित शाक्य, अमित कुशवाहा, अंकुश चौहान, रामकिशन कश्यप समेत बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी और किसान नेता शामिल हुए।
फर्रुखाबाद में किसानों का यह धरना केवल स्थानीय समस्या नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की हकीकत का आईना है। खाद संकट और कालाबाजारी ने किसानों की खेती और आजीविका दोनों को खतरे में डाल दिया है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है।



















