INDC Network : नई दिल्ली, भारत : भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 1 सितंबर 2025 को देशभर के लिए नई चेतावनी जारी की है। उत्तर भारत के कई राज्यों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि मध्य और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में येलो अलर्ट है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी वर्षा और तेज़ हवाओं की संभावना जताई गई है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार, 1 सितंबर 2025 को देशभर के लिए मौसम चेतावनी मानचित्र जारी किया है। ताज़ा अपडेट के अनुसार, उत्तर भारत के कई राज्यों में आगामी दिनों में अत्यधिक भारी वर्षा और बाढ़ जैसी स्थिति बनने की संभावना है।
मानचित्र के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। इसका अर्थ है कि इन क्षेत्रों में अत्यधिक भारी वर्षा, भूस्खलन, नदियों में जलस्तर बढ़ने और जनजीवन प्रभावित होने की पूरी संभावना है।
हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में रेड अलर्ट
वहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार के कुछ हिस्सों में ऑरेंज अलर्ट दिया गया है। यहां पर भारी बारिश और तेज़ हवाओं से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन और आम जनता को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और झारखंड समेत देश के दक्षिण और पूर्वी हिस्सों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बारिश की तीव्रता को देखते हुए अपनी फसलों और मवेशियों की सुरक्षा करने की सलाह दी गई है।
पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय, नागालैंड और मणिपुर में भी येलो और ग्रीन अलर्ट दिखाया गया है। इन क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है।
IMD की चेतावनी के अनुसार सावधानियां :
नदियों के किनारे रहने वाले लोग सतर्क रहें।
अनावश्यक यात्रा से बचें, विशेषकर पहाड़ी और भूस्खलन संभावित इलाकों में।
बिजली गिरने की घटनाओं से बचाव हेतु खुले मैदान में न जाएं।
प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।
IMD ने यह भी कहा है कि अगले कुछ दिनों में मानसून की सक्रियता देश के ज्यादातर हिस्सों में बनी रहेगी। यह समय कृषि कार्यों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन उत्तर भारत में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।