INDC Network : फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश : जसमई दरवाजा स्थित गेस्ट हाउस में किसान यूनियन की समीक्षा बैठक में नेताओं ने जमीन अधिग्रहण, सर्किल रेट और किसानों के अधिकारों पर प्रशासन को चेतावनी दी। फर्रुखाबाद में भारतीय किसान यूनियन की बैठक, मुआवजा और सर्किल रेट बना मुख्य मुद्दा भारतीय किसान यूनियन की जिला समीक्षा बैठक उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में आयोजित हुई, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष राजपाल शर्मा और जिलाध्यक्ष अजय कटियार सहित बड़ी संख्या में किसान और पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में लिंक एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीनों के मुआवजे, सर्किल रेट में भारी अंतर और प्रशासनिक रवैये पर तीखी चर्चा हुई।
बैठक में नेताओं ने कहा कि एक तरफ जमीन का रेट 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर बताया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर 1 करोड़ 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक मूल्यांकन हो रहा है। इस असमानता को किसानों के साथ अन्याय बताते हुए उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा। जिलाध्यक्ष अजय कटियार ने कहा कि प्रशासन से हमने बाजार भाव का चार गुना मुआवजा मिलने के लिए कहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई 20-20 मैच नहीं बल्कि टेस्ट मैच की तरह लंबी होगी और किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं।
प्रदेश अध्यक्ष राजपाल शर्मा ने कहा कि किसानों की जमीन उनसे बिना सहमति के कोई नहीं ले सकता। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी किसानों के आंदोलन के दबाव में केंद्र सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े थे और जरूरत पड़ी तो फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
सभा में मौजूद अन्य किसान नेता व किसान
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन किसानों की जमीन लिंक एक्सप्रेसवे में जा रही है, उनके समर्थन में गांव-गांव हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। नेताओं ने कहा कि जिला प्रशासन और सरकार दोनों दबाव में हैं और किसानों की एकता से ही न्याय मिलेगा।
बैठक में सिर्फ जमीन ही नहीं बल्कि ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। नेताओं ने बताया कि कुछ गांवों में प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे अपना नाम तक नहीं लिख पा रहे, जो शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति दर्शाता है।
राजपाल शर्मा ने कायमगंज क्षेत्र में धीमर नगला से ढाई घाट तक बांध निर्माण की मांग भी उठाई और कहा कि यदि बरसात से पहले काम नहीं हुआ तो बाढ़ प्रभावित किसान परिवार सहित धरना देंगे। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और अधिकारियों से तुरंत कार्रवाई की मांग की।
बैठक में साफ संकेत दिया गया कि किसान संगठन अब जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। नेताओं ने कहा कि किसान एकजुट रहें, क्योंकि अधिकार बिना संघर्ष के नहीं मिलते। किसानों की सहमति, उचित मुआवजा और पारदर्शी नीति लागू होने तक आंदोलन जारी रहेगा।