Indc Network: जीवनी:-दसवें प्रधानमंत्री के रूप में अल्पमत सरकार और राष्ट्रीय राजनीति में नई दिशा
भारत के 10वें प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी ने 1996 में अल्पकालिक लेकिन ऐतिहासिक कार्यकाल संभाला। 13 दिनों की सरकार के बावजूद उनका नेतृत्व, संसदीय परंपराओं के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय राजनीति में संतुलित दृष्टिकोण व्यापक रूप से सराहा गया। यह दौर भारतीय राजनीति में गठबंधन युग की शुरुआत का प्रतीक बना।
राजनीतिक परिदृश्य और शपथ ग्रहण
1996 के आम चुनावों के बाद देश में त्रिशंकु संसद की स्थिति बनी। ऐसे समय में अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। वे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय वक्ता के रूप में जाने जाते थे।
उन्होंने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और संसद में बहुमत साबित करने की तैयारी शुरू की। हालांकि पर्याप्त समर्थन न जुटा पाने के कारण उनकी सरकार मात्र 13 दिनों में गिर गई।
कार्यकाल की मुख्य विशेषताएँ
यद्यपि उनका पहला कार्यकाल बहुत छोटा था (मई 1996), फिर भी उन्होंने संसदीय लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखने का उदाहरण प्रस्तुत किया। विश्वास मत से पहले उन्होंने संसद में प्रभावशाली भाषण दिया, जिसे भारतीय संसदीय इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों में गिना जाता है
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| क्रमांक | 10वें प्रधानमंत्री |
| नाम | अटल बिहारी वाजपेयी |
| कार्यकाल | 16 मई 1996 – 1 जून 1996 |
| अवधि | 13 दिन |
| दल | भारतीय जनता पार्टी |
| विशेषता | गठबंधन युग की शुरुआत |
गठबंधन राजनीति का दौर
1990 के दशक में भारतीय राजनीति बहुदलीय और गठबंधन आधारित हो चुकी थी। वाजपेयी का 1996 का कार्यकाल इसी परिवर्तन का संकेत था। बाद में 1998 और 1999 में उन्होंने पुनः प्रधानमंत्री पद संभाला और स्थिर सरकार का नेतृत्व किया।उनका नेतृत्व शैली संवाद और सहमति पर आधारित थी, जिसने विपक्षी दलों के बीच भी सम्मान अर्जित किया।
संसदीय भाषण और लोकतांत्रिक परंपरा
विश्वास मत से पहले दिए गए उनके भाषण को आज भी लोकतांत्रिक मर्यादा का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे बहुमत के बिना सत्ता में बने रहना नहीं चाहते। यह कदम भारतीय राजनीति में नैतिक मूल्यों की मिसाल बना।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
हालांकि 1996 का कार्यकाल अल्पकालिक रहा, लेकिन वाजपेयी की छवि एक दूरदर्शी नेता की थी। आगे चलकर उनके नेतृत्व में भारत ने परमाणु परीक्षण (1998) और विदेश नीति में महत्वपूर्ण कदम उठाए।उनके व्यक्तित्व में कूटनीतिक संतुलन और राष्ट्रीय हितों की स्पष्टता दिखाई देती थी।
राजनीतिक विरासत
अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति में एक उदारवादी और सहमति-आधारित नेता के रूप में याद किया जाता है। 1996 का उनका कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन इसने गठबंधन युग के राजनीतिक समीकरणों को स्पष्ट कर दिया।उनकी राजनीतिक यात्रा ने यह सिद्ध किया कि लोकतंत्र में बहुमत और जनादेश का सम्मान सर्वोपरि है।भारत के 10वें प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी का 13 दिन का कार्यकाल ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह दौर न केवल गठबंधन राजनीति की शुरुआत का संकेत था, बल्कि संसदीय गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनः पुष्टि भी था।



















