INDC Network: बिहार:-विधानसभा टिप्पणी से गरमाई बिहार राजनीति, सोशल मीडिया पर तेजस्वी का जवाबबिहार विधानसभा में विधायक मैथिली ठाकुर द्वारा कथित रूप से लालू प्रसाद यादव की तुलना ‘धृतराष्ट्र’ और तेजस्वी यादव की तुलना ‘दुर्योधन’ से किए जाने पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए बिना नाम लिए इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की और इसे अपमानजनक बताया।
बिहार की राजनीति एक बार फिर बयानबाज़ी को लेकर गर्म हो गई है। विधानसभा में विधायक बनीं गायिका मैथिली ठाकुर के एक बयान को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (यूनाइटेड) के बीच सियासी तकरार तेज हो गई है।गुरुवार (19 फरवरी) को बिहार विधानसभा में बोलते हुए मैथिली ठाकुर ने ‘2005 से पहले के बिहार’ का उल्लेख करते हुए परोक्ष रूप से राजद शासन पर निशाना साधा। अपने भाषण में उन्होंने महाभारत के पात्रों का उदाहरण देते हुए संकेतों में ऐसी टिप्पणी की, जिसे राजद नेताओं ने लालू प्रसाद यादव की तुलना ‘धृतराष्ट्र’ और तेजस्वी यादव की तुलना ‘दुर्योधन’ से जोड़कर देखा। हालांकि मैथिली ठाकुर ने सीधे तौर पर न तो Lalu Prasad Yadav और न ही Tejashwi Yadav का नाम लिया, लेकिन उनके बयान को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
तेजस्वी यादव का पलटवार
राजद के कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए बिना नाम लिए विधायक की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि “कुछ लोग विधायक बनते ही राजनीति का पूरा ज्ञान होने का भ्रम पाल लेते हैं। विधायिका की बुनियादी बातें समझे बिना ही एक जननायक के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का दुस्साहस कर बैठते हैं।” तेजस्वी के इस बयान को मैथिली ठाकुर के विधानसभा भाषण का जवाब माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महाभारत के पात्रों से तुलना करना भारतीय राजनीति में नया नहीं है, लेकिन इस तरह की टिप्पणियां अक्सर सियासी माहौल को और अधिक तीखा बना देती हैं।
‘2005 से पहले का बिहार’ बना मुद्दा
मैथिली ठाकुर ने अपने संबोधन में ‘2005 से पहले के बिहार’ का जिक्र किया, जिसे आमतौर पर राजद शासनकाल से जोड़ा जाता है। इसी संदर्भ को लेकर राजद नेताओं ने इसे अपने शीर्ष नेतृत्व पर हमला माना। राजद समर्थकों का कहना है कि इस प्रकार की ऐतिहासिक और पौराणिक उपमाओं का इस्तेमाल राजनीतिक बहस को व्यक्तिगत स्तर तक ले जाता है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं का तर्क है कि विधानसभा में नीतिगत और ऐतिहासिक संदर्भ देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
नीतीश कुमार पर भी साधा निशाना
तेजस्वी यादव ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कानून-व्यवस्था कमजोर हो चुकी है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। तेजस्वी ने कहा कि प्रशासनिक तंत्र भ्रष्टाचार से प्रभावित है और आम जनता परेशान है। उन्होंने यह भी तंज कसा कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व की निष्क्रियता के कारण राज्य में अराजकता का माहौल बन रहा है।
सियासी असर
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे दिया है। विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह बयानबाज़ी का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऐसे बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं, जहां ऐतिहासिक और पौराणिक प्रतीकों के माध्यम से राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जाती है।
| क्रमांक | विषय | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | विवाद | महाभारत पात्रों से तुलना |
| 2 | स्थान | बिहार विधानसभा |
| 3 | प्रतिक्रिया | तेजस्वी यादव का सोशल मीडिया पोस्ट |
| 4 | संदर्भ | ‘2005 से पहले का बिहार’ |
| 5 | अन्य मुद्दा | कानून-व्यवस्था पर नीतीश सरकार की आलोचना |
बिहार विधानसभा में विधायक मैथिली ठाकुर की टिप्पणी को लेकर राजद और जदयू के बीच सियासी घमासान छिड़ गया है। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए टिप्पणी को अपमानजनक बताया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।


















