INDC Network: नई दिल्ली,भारत:- लोकसभा में ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव, जानें स्पीकर को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया लोकसभा में स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए विपक्ष ने प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। यह प्रस्ताव सोमवार (9 मार्च) को सदन में पेश किया जाएगा। नियमों के अनुसार प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। हालांकि लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास बहुमत होने के कारण प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है।
लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया क्या? ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव आज
लोकसभा में अध्यक्ष Om Birla को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाया गया प्रस्ताव सोमवार (9 मार्च) को सदन में पेश किया जाएगा। विपक्ष ने स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है और कहा है कि उन्होंने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता बनाए नहीं रखी। संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju के अनुसार यह प्रस्ताव कांग्रेस के सांसद Mohammad Javed, K. Suresh और Mallu Ravi द्वारा सदन में पेश किया जाएगा। संसद में इस मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है ताकि वे चर्चा और मतदान के दौरान उपस्थित रहें।
प्रस्ताव पेश करने की प्रक्रिया
लोकसभा के नियमों के अनुसार किसी भी स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ निश्चित प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होता है। सबसे पहले स्पीकर को हटाने के लिए लिखित नोटिस देना पड़ता है। इस नोटिस पर कम से कम दो सांसदों के हस्ताक्षर होने चाहिए और इसे 14 दिन पहले जमा करना होता है। जब प्रस्ताव सदन में पेश किया जाता है तो स्पीकर के बुलाने पर कम से कम 50 सांसदों को अपने स्थान पर खड़े होकर उसका समर्थन करना होता है। अगर 50 सदस्य समर्थन में खड़े हो जाते हैं तो प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है और उसके बाद इस पर चर्चा और मतदान कराया जाता है। यदि 50 सांसद समर्थन में नहीं खड़े होते तो प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जाता।
संविधान क्या कहता है
भारतीय संविधान के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव आने पर उन्हें सदन में उपस्थित रहने और अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है। वे प्रस्ताव पर चर्चा में भाग ले सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं। हालांकि जिस समय उनके खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा चल रही हो, उस समय वे सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। उस दौरान लोकसभा की कार्यवाही उपाध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य द्वारा संचालित की जाती है। सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव प्रश्नकाल के बाद लगभग दोपहर 12 बजे सदन में पेश किया जा सकता है।
ओम बिरला पर विपक्ष के आरोप
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन में निष्पक्षता बनाए नहीं रखी और कई मामलों में सत्तारूढ़ दल का पक्ष लिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि विपक्ष के नेता और अन्य विपक्षी सांसदों को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसके अलावा विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ महिला सांसदों पर अनुचित आरोप लगाए गए और कई विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया। विपक्ष का कहना है कि स्पीकर का पद पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन हाल के समय में उनकी कार्यशैली से सदन के सदस्यों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
लोकसभा में किसके पास कितना बहुमत
लोकसभा में स्पीकर को हटाने के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत यानी कम से कम 272 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। मौजूदा स्थिति में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है।
सरकार के पक्ष में कुल 293 सांसद बताए जा रहे हैं, जिनमें Bharatiya Janata Party के 240, Janata Dal (United) के 16 और Telugu Desam Party के 12 सांसद शामिल हैं।
वहीं विपक्ष के पास कुल लगभग 238 सांसद हैं, जिनमें Indian National Congress के 99 सांसद और बाकी Samajwadi Party, Dravida Munnetra Kazhagam और All India Trinamool Congress सहित अन्य दलों के सांसद शामिल हैं।
ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के पास बहुमत होने के कारण यह प्रस्ताव पारित होना मुश्किल है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| मुद्दा | लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव |
| संबंधित नेता | ओम बिरला |
| पद | लोकसभा अध्यक्ष |
| प्रस्ताव पेश करने की तारीख | 9 मार्च |
| प्रस्ताव पेश करने वाले | मोहम्मद जावेद, के. सुरेश, मल्लु रवि |
| प्रस्ताव स्वीकार करने की शर्त | कम से कम 50 सांसदों का समर्थन |
| हटाने के लिए जरूरी बहुमत | 272 सांसद |
| सरकार के समर्थक सांसद | 293 |
| विपक्ष के सांसद | 238 |
| संभावित परिणाम | प्रस्ताव खारिज होने की संभावना |
लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष ने प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। नियमों के अनुसार प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है और अंतिम निर्णय मतदान से होता है। हालांकि मौजूदा लोकसभा में सरकार के पास बहुमत होने के कारण प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है।



















