INDC Network : उत्तराखंड :- कोटद्वार मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी दीपक कुमार की सुरक्षा मांग पर जताई आपत्ति उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कोटद्वार प्रकरण से जुड़े जिम संचालक दीपक कुमार उर्फ “मोहम्मद दीपक” की याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा कि जब कोई व्यक्ति स्वयं जांच के दायरे में संदिग्ध आरोपी है, तो वह पुलिस सुरक्षा की मांग कैसे कर सकता है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ द्वारा उस समय की गई, जब याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने के साथ-साथ पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग भी अदालत के समक्ष रखी।
अदालत ने याचिका को बताया दबाव बनाने की रणनीति
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं अक्सर जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि चल रही जांच के दौरान ऐसी अतिरिक्त मांगें करना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास प्रतीत होता है।
अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में याचिकाकर्ता स्वयं एक “संदिग्ध आरोपी” है। ऐसे में उसे पुलिस सुरक्षा प्रदान करने की मांग न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती। न्यायालय ने इस प्रकार की मांग को पूरी तरह अनावश्यक बताया।
कोटद्वार घटना से जुड़ा है मामला
यह मामला 26 जनवरी को कोटद्वार में हुई एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि एक मुस्लिम दुकानदार द्वारा अपनी दुकान का नाम “बाबा” रखने को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान बजरंग दल के कुछ सदस्यों के साथ दीपक कुमार का झगड़ा हो गया था।
इस घटना के बाद उनके खिलाफ दंगा करने, चोट पहुंचाने और शांति भंग करने के इरादे से अपमानित करने जैसे आरोपों में मामला दर्ज किया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि कथित घृणा भाषण देने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा उन्होंने अपने और अपने परिवार के लिए पुलिस सुरक्षा तथा कथित पक्षपातपूर्ण व्यवहार के आरोप में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग भी रखी।
हालांकि अदालत ने इन मांगों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जांच लंबित रहने के दौरान इस प्रकार के अनुरोध करना जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में ऐसे आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
धनराशि मिलने के आरोपों पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने घटना के बाद समर्थकों से मिली कथित आर्थिक सहायता के बारे में भी सवाल उठाए। दीपक कुमार की ओर से बताया गया कि घटना के बाद उन्हें लगभग 80 हजार रुपये की धनराशि दान के रूप में प्राप्त हुई थी, जिसके बाद उन्होंने अपने खाते की गतिविधियां बंद कर दी थीं।
अदालत ने इस मामले से जुड़े तथ्यों को रिकॉर्ड में प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता की ओर से कोई अतिरिक्त शिकायत दर्ज कराई गई है, तो उसे भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
फिलहाल इस मामले की सुनवाई जारी है और अदालत की टिप्पणियों के बाद यह प्रकरण कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार मामले में आरोपी दीपक कुमार द्वारा पुलिस सुरक्षा की मांग पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच के दायरे में शामिल व्यक्ति ऐसी राहत कैसे मांग सकता है और इसे जांच प्रभावित करने की कोशिश बताया।
| Field | Details |
|---|---|
| Court | उत्तराखंड हाईकोर्ट |
| Judge | न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल |
| Accused | दीपक कुमार (मोहम्मद दीपक) |
| Incident Date | 26 जनवरी |
| Location | कोटद्वार |
| Allegations | दंगा, चोट पहुंचाना, शांति भंग |
| Organization Involved | बजरंग दल |
| Relief Requested | FIR रद्द, पुलिस सुरक्षा |
| Court Observation | जांच पर दबाव बनाने की कोशिश |
| Donation Mentioned | ₹80,000 (कथित) |
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार मामले में आरोपी दीपक कुमार की पुलिस सुरक्षा मांग पर सख्त टिप्पणी करते हुए इसे जांच प्रभावित करने की कोशिश बताया और याचिका में उठाए गए अन्य अनुरोधों पर भी सवाल उठाए।
















