INDC Network : फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश: सद्भावना मंच की ओर से होटल विन्याशा में आयोजित ईद मिलन समारोह में जनपद के विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर ईद-उल-फितर की एक-दूसरे को गले मिलकर बधाई दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य अतिथि भंते नागसेन जी ने की, जबकि संचालन डॉक्टर मोहम्मद मोहसिन ने किया। समारोह में वक्ताओं ने एकमत होकर विश्व शांति, भारत की खुशहाली और देश की जनता की तरक्की पर जोर दिया।
कार्यक्रम में वक्ता जवाहर सिंह गंगवार ने सभी धर्मों के विचारों की प्रशंसा करते हुए भाईचारे का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने वकालत पेशे के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कचहरी में कई तरह के मुकदमे आते हैं, लेकिन धर्म के आधार पर मुकदमे नहीं आते। इससे स्पष्ट है कि समाज में लोगों के बीच आपसी समझ और भाईचारा कायम है।
मोहम्मद हफीज खान ने सद्भावना मंच की शुरुआत जमाते इस्लामी फर्रुखाबाद में वर्ष 1913 से होने की बात कही। उन्होंने कहा कि मंच के माध्यम से सभी लोग मिलजुलकर कार्यक्रम आयोजित करते हैं और समाज सेवा के कार्यों में सहयोग देते हैं। ओम ने अपने संबोधन में कहा कि हमें अपने पारिवारिक कार्यों के साथ-साथ समाज सेवा, महिलाओं और बच्चों की सहायता तथा अमन-चैन से जीवन बिताने के प्रयास करने चाहिए।
मोहम्मद नासिर ने संस्था को विविधताओं का संग्रह बताते हुए विगत कार्यक्रमों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। वहीं माननीय मजहर मोहम्मद खान ने कहा कि विश्व और भारत में उत्पन्न समस्याओं और विवादों को हल करने के लिए सभी को प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी धर्म इंसानियत का संदेश देते हैं और लोगों को ईश्वर के महत्व की याद दिलाते हैं।
कार्यक्रम के संयोजक डॉक्टर रामकृष्ण राजपूत ने बताया कि सद्भावना मंच द्वारा होली मिलन, ईद मिलन, निर्धनों की सहायता, संकटकाल में कंबल वितरण तथा जरूरतमंद पड़ोसियों की मदद जैसे कार्य लगातार किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्धों का अंत समय की आवश्यकता है और समाज में शांति बनाए रखना जरूरी है।
डॉ. सलीम राजा एडवोकेट ने कहा कि अनेकताओं में एकता बनाए रखते हुए भाईचारा कायम रखना चाहिए। समाजसेवी संजय गर्ग ने सभी धर्मों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए इस ईद मिलन समारोह को महत्वपूर्ण पहल बताया। जनाब मोहम्मद अमीन खान ने कहा कि हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि विविधताओं वाले देश में प्रेम और मोहब्बत के साथ मिलजुल कर रहें।
ज्ञानी मंगल सिंह जी ने मानवता, भाईचारा, प्रेम और त्याग की भावना पर जोर दिया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सभी इंसान परमात्मा की संतान हैं और सभी धर्म समानता का संदेश देते हैं। प्रधानाचार्य राजेंद्र पाल ने भी मानवता की भावना को बढ़ावा देने की बात कही और ऐसे आयोजनों को समाज के लिए जरूरी बताया।
बौद्ध भिक्षु भंते नागसेन जी ने अपने संबोधन में मथुरा की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून को हाथ में लेना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में किसी भी वर्ग पर अत्याचार होने पर समाज को चुप नहीं रहना चाहिए और सभी को मिलकर शांति और सौहार्द बनाए रखना चाहिए।



















