INDC Network : उत्तर प्रदेश :- Uttar Pradesh में 2029 के Lok Sabha चुनाव से पहले परिसीमन की संभावना जताई जा रही है। Nari Shakti Vandan Adhiniyam लागू होने के बाद सीटों की संख्या 80 से बढ़कर लगभग 120 तक पहुंच सकती है।
Uttar Pradesh का सियासी नक्शा 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बदल सकता है। संभावना जताई जा रही है कि परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया के बाद राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 80 से बढ़कर करीब 120 तक पहुंच सकती है। यह बदलाव पूरे देश में संसद सीटों की संभावित बढ़ोतरी और Nari Shakti Vandan Adhiniyam के लागू होने से जुड़ा माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून लागू करने की तैयारी में है। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नए परिसीमन की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी प्रक्रिया के तहत देशभर में लोकसभा सीटों की कुल संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर लगभग 816 तक करने पर विचार किए जाने की चर्चा है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
देश में सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश से वर्तमान में 80 सांसद Lok Sabha में चुने जाते हैं। यदि परिसीमन लागू होता है, तो सीटों की संख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी इसी राज्य में देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि राज्य में सीटों की संख्या बढ़कर करीब 120 तक पहुंच सकती है।
मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 63 सामान्य श्रेणी की हैं, जबकि 17 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं। परिसीमन के बाद सामान्य सीटों की संख्या बढ़कर लगभग 94–95 और SC आरक्षित सीटें 25–26 तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इससे राज्य के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो 1951 में हुए पहले आम चुनाव के समय उत्तर प्रदेश से कुल 69 निर्वाचन क्षेत्र थे। उस समय Uttarakhand अलग राज्य नहीं बना था और कुछ क्षेत्रों से दो-दो सांसद चुने जाते थे। बाद में 1973 के परिसीमन के बाद राज्य में कुल 85 लोकसभा सीटें हो गई थीं।
सन् 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर Uttarakhand राज्य बनने के बाद पांच सीटें वहां चली गईं और उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या घटकर 80 रह गई, जो आज भी लागू है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 2029 से पहले परिसीमन लागू होता है, तो इसका असर केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चुनावी रणनीतियों, सामाजिक समीकरणों और राजनीतिक दलों की ताकत पर भी पड़ेगा। नई सीटों के गठन से कई नए राजनीतिक क्षेत्र उभरेंगे और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व में भी बदलाव आएगा।
इसके अलावा महिला आरक्षण कानून लागू होने के बाद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सीटों का पुनर्गठन आवश्यक माना जा रहा है। इसी वजह से परिसीमन प्रक्रिया को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू किए जाने की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि अभी परिसीमन को लेकर अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। लेकिन यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो उत्तर प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य आगामी लोकसभा चुनाव से पहले पूरी तरह बदल सकता है और राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
| वर्ष | सीटों की स्थिति |
|---|---|
| 1951 | 69 निर्वाचन क्षेत्र (कुछ डबल-मेंबर सीटें) |
| 1973 | परिसीमन के बाद 85 सीटें |
| 2000 | उत्तराखंड अलग होने के बाद 80 सीटें |
| वर्तमान | 80 सीटें |
| संभावित (2029) | लगभग 120 सीटें (अनुमान) |
2029 लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन और महिला आरक्षण कानून लागू होने की स्थिति में उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर लगभग 120 तक पहुंच सकती हैं।



















