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बांदा पोक्सो केस में 33 बच्चों के शोषण पर दंपती को फांसी

INDC Network : बाँदा, उत्तर प्रदेश :-स्पेशल पोक्सो कोर्ट का सख्त फैसला, हर पीड़ित को 10 लाख मुआवजा

उत्तर प्रदेश के बांदा में पोक्सो मामलों की विशेष अदालत ने 33 नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के मामले में आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मामला मानते हुए प्रत्येक पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।

बांदा (उत्तर प्रदेश)। बच्चों के खिलाफ हुए एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले में बांदा की विशेष पोक्सो (POCSO) अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों को 33 नाबालिग बच्चों के साथ गंभीर यौन अपराध, पोर्नोग्राफिक मकसद से बच्चों का इस्तेमाल और बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री के निर्माण व संग्रहण जैसे जघन्य अपराधों में दोषी पाया।

विशेष न्यायाधीश ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में रखते हुए कड़ी से कड़ी सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि यह अपराध अत्यंत संगठित, योजनाबद्ध और अमानवीय प्रकृति का है, जिसमें मासूम बच्चों को लंबे समय तक निशाना बनाया गया।

हर पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अतिरिक्त आरोपियों के घर से जब्त की गई नकद राशि को भी पीड़ितों के बीच समान रूप से वितरित करने का आदेश दिया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ितों के पुनर्वास और मनोवैज्ञानिक सहायता के लिए संबंधित विभाग आवश्यक कदम उठाएं।

सीबीआई ने दर्ज किया था मामला

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने 31 सितंबर 2020 को आरोपी रामभवन और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान सामने आया कि वर्ष 2010 से 2020 के बीच बांदा और चित्रकूट क्षेत्र में सक्रिय रहकर आरोपियों ने 33 बच्चों को अपना शिकार बनाया।रामभवन सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी बच्चों को ऑनलाइन वीडियो गेम्स, पैसे और उपहारों का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

जांच के दौरान फोरेंसिक विशेषज्ञों, मेडिकल एक्सपर्ट्स और चाइल्ड प्रोटेक्शन अथॉरिटीज के साथ समन्वय स्थापित किया गया। डिजिटल साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य तकनीकी प्रमाणों के आधार पर आरोपों की पुष्टि हुई। सीबीआई ने 10 फरवरी 2021 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों को दोषी करार दिया गया।

पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ित बच्चे अभी भी मनोवैज्ञानिक आघात से गुजर रहे हैं। संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि बच्चों की काउंसलिंग, शिक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यह फैसला बच्चों के खिलाफ अपराधों पर न्यायपालिका की सख्त नीति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित और कठोर दंड समाज में निवारक प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार प्राप्त है।

क्रमांकविषयविवरण
1मामला33 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण
2स्थानबांदा, उत्तर प्रदेश
3आरोपीरामभवन और दुर्गावती
4जांच एजेंसीसीबीआई
5सजाफांसी (रेयरेस्ट ऑफ रेयर)
6मुआवजाप्रत्येक पीड़ित को 10 लाख रुपये
7अतिरिक्त आदेशजब्त नकदी का वितरण

बांदा की विशेष पोक्सो अदालत ने 33 बच्चों के यौन शोषण के मामले में आरोपी दंपती को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने प्रत्येक पीड़ित को 10 लाख रुपये मुआवजा देने और जब्त नकदी वितरित करने का आदेश दिया है। यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में रखा गया।

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