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फर्रुखाबाद आलू मंडी में किसानों की दुर्दशा, ट्रालियां लौटीं; सरकार पर जिम्मेदारी का आरोप

INDC Network : फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद की आलू मंडी में किसानों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष इंजीनियर नीरज प्रताप शाक्य ने अपनी टीम के साथ मंडी पहुंचकर किसानों से बातचीत की और आरोप लगाया कि सरकारी नीतियों के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि मंडी में खरीदार नहीं मिल रहे, जिसके कारण सैकड़ों ट्रालियां आलू से भरी वापस लौट रही हैं और फसल सड़ने की कगार पर है।

जिले की आलू मंडी में किसानों की स्थिति इन दिनों बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। 10 मार्च 2026 को आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष इंजीनियर नीरज प्रताप शाक्य अपनी टीम के साथ आलू मंडी पहुंचे और वहां मौजूद किसानों से उनकी समस्याओं के बारे में बातचीत की। किसानों ने बताया कि पिछले कई दिनों से मंडी में आलू बेचने के लिए भारी संख्या में ट्रालियां पहुंच रही हैं, लेकिन खरीदारों की कमी के कारण फसल नहीं बिक पा रही है।

किसानों का आरोप: कई ट्रालियां बिना बिके लौट रहीं

मंडी में मौजूद किसानों ने बताया कि पिछले दो से तीन दिनों से आलू से भरी ट्रालियां लंबी कतारों में खड़ी हैं। इसके बावजूद कोई खरीदार आगे नहीं आ रहा है। किसानों के अनुसार आज अकेले ही 500 से ज्यादा ट्रालियां बिना बिके वापस लौट गईं। इससे किसानों में निराशा और चिंता का माहौल है।

किसानों का कहना है कि इस वर्ष आलू का उत्पादन भी बहुत अधिक नहीं हुआ है, फिर भी मंडी में उचित दाम नहीं मिल पा रहा। कई किसानों ने बताया कि स्थिति इतनी खराब है कि कुछ लोग लगभग 50 कुंतल आलू की पूरी ट्राली मात्र 1500 रुपये में बेचने को तैयार हैं, लेकिन इसके बावजूद खरीददार नहीं मिल रहे।

“आलू ले लो आलू” की पुकार

मंडी में किसानों की आवाज में नाराजगी साफ दिखाई दी। कई किसानों ने कहा कि वे लगातार पुकार लगा रहे हैं—“आलू ले लो आलू”—लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। उनका कहना है कि अगर मंडी में ही फसल नहीं बिकेगी तो फिर किसान अपनी उपज कहां ले जाएं।

कुछ किसानों ने यह भी कहा कि मजबूरी में कई लोग आलू वापस ले जा रहे हैं, जबकि कुछ किसान फसल को फेंकने तक को मजबूर हो रहे हैं क्योंकि भंडारण की व्यवस्था भी सीमित है।

सरकार और जनप्रतिनिधियों पर सवाल

इस दौरान इंजीनियर नीरज प्रताप शाक्य ने किसानों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। उनका आरोप है कि किसानों की फसल की सही कीमत सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके कारण किसान आर्थिक संकट में फंस रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर किसान अपनी फसल का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

समाधान की मांग

किसानों और स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि आलू किसानों की समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए और उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाया जाए। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसानों की इस समस्या को अधिक से अधिक साझा किया जाए, ताकि संबंधित अधिकारियों और सरकार तक उनकी आवाज पहुंच सके।

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