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होर्मुज से भारतीय जहाजों को मिली राहत, जयशंकर बोले- कूटनीति का असर दिखा

INDC Network: नई दिल्ली :- ईरान ने भारतीय जहाजों को दी होर्मुज से गुजरने की अनुमति, जयशंकर ने बताया कूटनीति का असर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति भारतीय जहाजों को मिल गई है, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कुछ हद तक कम हुई है। इस पूरे घटनाक्रम को भारत की सक्रिय कूटनीति का परिणाम माना जा रहा है।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस मामले पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक और स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने बताया कि ईरान के साथ लगातार संवाद और तालमेल के चलते भारतीय जहाजों को यह अनुमति मिल पाई है।

दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कई जहाजों पर रोक लगा दी थी। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से ऊर्जा संसाधनों का आयात करता है।

हालांकि, अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया था कि केवल ‘दुश्मन देशों’ और उनके सहयोगियों के जहाजों को ही रोका जाएगा। इसी बीच भारत के दो जहाज—शिवालिक और नंदा देवी—को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई, जो कुल 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।

जयशंकर ने बताया कि यह अनुमति किसी विशेष समझौते या डील के तहत नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि ईरान ने इसके बदले भारत से कोई शर्त या मांग नहीं रखी है। यह दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे भरोसे और मजबूत रिश्तों का परिणाम है।

विदेश मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने के बाद से उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से चार बार फोन पर बातचीत की है। इन चर्चाओं में भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

जयशंकर ने कहा कि “कुछ न करने से बेहतर है कि हम बातचीत के जरिए समाधान निकालें।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने कूटनीतिक तरीके से स्थिति को संभालने की कोशिश की और इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है।

हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यह कोई स्थायी या ‘ब्लैंकेट अरेंजमेंट’ नहीं है। हर जहाज के लिए अलग-अलग अनुमति ली जाती है और हर केस को अलग तरीके से देखा जाता है।

जयशंकर ने आगे कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है और अभी भारत के कई अन्य जहाज भी उस क्षेत्र में मौजूद हैं। सरकार लगातार ईरान के साथ संपर्क में है ताकि आगे भी भारतीय जहाजों की आवाजाही सुचारू रूप से जारी रह सके।

जब उनसे पूछा गया कि क्या अन्य देश भी भारत की तरह ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि हर देश का ईरान के साथ रिश्ता अलग होता है और उसकी तुलना नहीं की जा सकती।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय कूटनीति कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत ने बिना किसी टकराव के बातचीत के जरिए अपने हितों की रक्षा की है, जो वैश्विक मंच पर उसकी रणनीतिक समझ को दर्शाता है।

फिलहाल, इस राहत के बावजूद मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

ईरान ने भारत के दो जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इसे भारत-ईरान कूटनीति का सकारात्मक परिणाम बताया है। हालांकि यह स्थायी व्यवस्था नहीं है और हर जहाज के लिए अलग अनुमति ली जाएगी।

FieldDetails
Routeस्ट्रेट ऑफ होर्मुज
Countries Involvedभारत, ईरान
Indian Shipsशिवालिक, नंदा देवी
Cargo92,712 मीट्रिक टन LPG
Key Personडॉ. एस. जयशंकर
Iran Representativeअब्बास अराघची
Permission Typeकेस-टू-केस आधार
Statusकूटनीतिक वार्ता जारी

ईरान ने भारत के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भारत को राहत मिली है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इसे कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम बताया है और कहा है कि यह केवल शुरुआत है, आगे भी बातचीत जारी रहेगी।

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