INDC Network : जीवन परिचय : राजनीतिज्ञ और समाजसेवी : भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहां हर नागरिक को समान अधिकार प्राप्त हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि समाज के पिछड़े, शोषित और दबे-कुचले वर्गों के हक के लिए भी आवाज़ उठाते हैं। इन्हीं में से एक नाम है – मोहम्मद शहेजान मंसूरी। एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता, राजनेता और जन आंदोलनों के प्रेरणास्रोत, जिन्होंने कम उम्र में समाज सेवा को अपना उद्देश्य बना लिया और राजनीति को एक ज़रिया चुना, लोगों की सेवा करने का।
मोहम्मद शहेजान मंसूरी की प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
मोहम्मद शहेजान मंसूरी का जन्म 12 अप्रैल 1998 को भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के जनपद फर्रुखाबाद के एक छोटे से गाँव पचपुखरा, जो ग्राम पंचायत नूरपुर गढिया के अंतर्गत आता है, में हुआ। उनके पिता का नाम मोहम्मद बदरुद्दीन मंसूरी और माता का नाम शहीदन मंसूरी है। एक सामान्य परिवार से आने वाले शहेजान मंसूरी के माता-पिता ने उन्हें एक नेक इंसान और काबिल डॉक्टर के रूप में देखने का सपना संजोया था।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई और आगे चलकर उन्होंने स्नातक (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी रुचि लेने लगे, जिससे यह संकेत मिलने लगा कि वे भविष्य में केवल डिग्रीधारी युवा नहीं बल्कि सामाजिक चेतना से लैस एक जागरूक नागरिक बनने वाले हैं।
मोहम्मद शहेजान मंसूरी का राजनीतिक रुझान और सामाजिक गतिविधियां
अपनी शिक्षा के दौरान ही मोहम्मद शहेजान मंसूरी ने महसूस किया कि देश की राजनीति में आम जनता की आवाज़ बहुत हद तक अनसुनी रह जाती है। उन्होंने भारतीय राजनीति की स्थिति का गंभीर विश्लेषण किया और पाया कि अधिकतर नेता चुनाव जीतने के बाद अपने वादों को भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि:
“देश की जनता वोट इसलिए देती है कि उन्हें 24 घंटे बिजली, स्वच्छ पानी, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मान से जीने का हक मिले, लेकिन नेता सत्ता की आड़ में आम जनता का दमन करते हैं।”
उनकी विचारधारा डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों से प्रेरित रही। उन्होंने बाबा साहब के उस कथन को याद करते हुए कहा:
“भारत का संविधान चाहे जितना भी अच्छा क्यों न हो, अगर उसे चलाने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे तो वह असफल साबित होगा।”

मो. शहेजान मंसूरी
मोहम्मद शहेजान मंसूरी का राजनीति में सक्रिय प्रवेश
अपने सामाजिक सरोकारों को राजनीतिक मंच पर लाने के लिए उन्होंने जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) पार्टी की सदस्यता ली, जो कि रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया द्वारा स्थापित की गई थी। इस पार्टी में उनकी मेहनत और समर्पण को देखते हुए उन्हें अल्पसंख्यक सभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति कम उम्र में मिलने वाली बड़ी जिम्मेदारी थी, लेकिन मोहम्मद शहेजान मंसूरी ने इसे पूरी निष्ठा से निभाया।
मोहम्मद शहेजान मंसूरी की विवादित कानूनों के विरोध में भागीदारी
जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार ने देश में CAA (नागरिकता संशोधन कानून), NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर), और NPP जैसे कानूनों को लागू किया, तब इन कानूनों का पूरे देशभर में व्यापक विरोध शुरू हुआ। इन कानूनों को लेकर देश की जनता में डर का माहौल था, खासकर मुसलमान, दलित, और गरीब तबकों में।
दिल्ली के शाहीन बाग आंदोलन में भी मोहम्मद शहेजान मंसूरी ने हिस्सा लिया और लगभग 14 दिनों तक आंदोलन स्थल पर डटे रहे। इस दौरान पार्टी की ओर से उन्हें नोटिस भेजा गया, जिसमें कहा गया कि पार्टी इन कानूनों का समर्थन कर रही है, जबकि वे उनका विरोध कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व ने यह भी चेतावनी दी कि उन्हें पदमुक्त किया जा सकता है।

मोहम्मद शहेजान मंसूरी ने बिना झिझक यह जवाब दिया:
“मैं एक पद के लिए लाखों-करोड़ों नागरिकों की नागरिकता की कुर्बानी नहीं दे सकता।”
इसके बाद उन्होंने जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी से इस्तीफा दे दिया और स्वतंत्र रूप से सामाजिक संघर्ष का रास्ता अपनाया।
मोहम्मद शहेजान मंसूरी का भीम आर्मी और चंद्रशेखर आज़ाद से जुड़ाव
CAA-NRC के विरोध में दिल्ली के जामा मस्जिद के बाहर भीम आर्मी भारत एकता मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व में आंदोलन हो रहा था। मोहम्मद शहेजान मंसूरी ने इस आंदोलन में भी सक्रिय भागीदारी की और देश की राजधानी में हो रहे इस व्यापक आंदोलन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
उनके समर्पण को देखते हुए भीम आर्मी भारत एकता मिशन में उन्हें भीम आर्मी प्रदेश अध्यक्ष सिकंदर बौद्ध के माध्यम से सदस्यता दी गई और जल्द ही वे संगठन के जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाए गए। चंद्रशेखर आज़ाद के साथ मिलकर काम करने और उनके संघर्ष को निकट से देखने का अवसर भी उन्हें मिला, जिसके बाद उन्हें कानपुर मंडल उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।

शहेजान मंसूरी संघर्ष, गिरफ्तारी और समर्पण
अपने सामाजिक अभियानों और जन आंदोलनों में भाग लेने के कारण मोहम्मद शहेजान मंसूरी को कई बार गिरफ्तार भी किया गया। लेकिन उन्होंने हर बार यह साबित किया कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उनका कहना है:
“अगर मैं डॉक्टर बनता तो केवल मरीजों की सेवा कर सकता था, लेकिन एक नेता बनकर मैं पूरे देश की सेवा कर सकता हूं।”
इस सोच ने उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता से आगे बढ़ाकर राजनीतिक जननायक बनने की ओर प्रेरित किया।

मोहम्मद शहेजान मंसूरी की वर्तमान सक्रियता
भीम आर्मी भारत एकता मिशन में निरंतर कार्य करते हुए मोहम्मद शहेजान मंसूरी को कानपुर मण्डल उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए वे न सिर्फ संगठन के कार्यों को दिशा दे रहे हैं बल्कि दलित, पिछड़े, गरीब और अल्पसंख्यक वर्गों की आवाज़ को बुलंद कर रहे हैं।
वर्तमान में वे एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नेता के रूप में समाज के हर उस मुद्दे को उठाते हैं, जिससे गरीब और कमजोर वर्ग प्रभावित हो रहा है।
शहेजान मंसूरी ग्राम पंचायत चुनाव और अनुभव
मार्च 2022 में मोहम्मद शहेजान मंसूरी ने अपने क्षेत्र ग्राम पंचायत नूरपुर से चुनाव लड़ा। यह चुनाव उनके लिए पहला था, लेकिन पूरे आत्मविश्वास और जनसंपर्क के साथ उन्होंने मैदान में उतरकर एक मजबूत चुनावी लड़ाई लड़ी।
हालांकि वे मात्र 9 वोटों के अंतर से हार गए, लेकिन इस हार ने उनके हौसले को कमजोर नहीं किया। बल्कि यह एक संकेत था कि जनता उनके साथ है और आगे आने वाले समय में वे और अधिक मजबूती के साथ उभरेंगे।
निष्कर्ष: एक आशा, एक नेतृत्व
मोहम्मद शहेजान मंसूरी की कहानी एक ऐसे युवा की है, जिसने अपने करियर के स्वार्थ को त्यागकर समाज के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने साबित किया है कि पद, प्रतिष्ठा और लोकप्रियता से बड़ा होता है जनता का विश्वास और संविधान के प्रति निष्ठा। वे आज भी संघर्ष कर रहे हैं – सड़क से संसद तक, गाँव से राजधानी तक – और देश को एक बेहतर दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत को ऐसे ही युवाओं की जरूरत है जो सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि सबके लिए सोचते हैं।





















