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सबसे छोटी संख्या लिखने के गणितीय शोध पर मैनपुरी के शिक्षक एवं एआरपी रत्नेश कुमार को भारत सरकार से मिला कॉपीराइट पंजीकरण

INDC Network : मैनपुरी, उत्तर प्रदेश : जनपद मैनपुरी के भोगांव निवासी गणित शिक्षक एवं स्वतंत्र शोधकर्ता रत्नेश कुमार की पुस्तक “सबसे छोटी संख्याएँ लिखने के रत्नेश के तर्क (RATNESH’S LOGICS TO WRITE THE SMALLEST NUMBERS)” को कठिन जांच प्रक्रिया से गुजरने के बाद लगभग एक वर्ष पश्चात भारत सरकार से कॉपीराइट पंजीकरण प्राप्त हुआ है। यह कॉपीराइट संरक्षण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्य है और विश्व के लगभग 181 देशों में प्रभावी माना जाता है।

रत्नेश कुमार ने इसके लिए 10 मार्च 2025 को आवेदन किया था तथा 25 मार्च 2025 को उन्हें डायरी नंबर प्राप्त हुआ था। यह पंजीकरण उनके द्वारा प्रस्तुत एक गणितीय अवधारणा पर आधारित है, जिसमें दिए गए अंकों से सबसे छोटी संख्या बनाने के प्रचलित नियम की तार्किक पुनर्व्याख्या की गई है।

भारत सरकार द्वारा जारी किया गया कापीराइट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट

सामान्यतः गणित में यह पढ़ाया जाता है कि यदि दिए गए अंकों में शून्य शामिल हो तो सबसे छोटी संख्या बनाते समय शून्य को प्रारंभ में नहीं लिखा जाता। उदाहरण के लिए 0, 1, 2 अंकों से बनने वाली सबसे छोटी संख्या 102 मानी जाती है।
जबकि रत्नेश कुमार के अनुसार अंकों को सीधे आरोही क्रम में लिखना अधिक प्राकृतिक और तार्किक है। उदाहरण के लिए 0, 1, 2 से बनने वाली तीन अंकों की सबसे छोटी संख्या 012 तथा 0, 1, 2, 3 से बनने वाली चार अंकों की सबसे छोटी संख्या 0123 होनी चाहिए।

रत्नेश कुमार का मानना है कि यदि इस प्रकार के गणितीय तर्कों का अकादमिक स्तर पर अध्ययन और परीक्षण किया जाए, तो गणित शिक्षण को अधिक तार्किक, सरल, भयमुक्त तथा विद्यार्थियों के लिए रोचक बनाया जा सकता है।
उन्होंने अपने इन तर्कों को डाइट भोगांव, ब्लॉक संसाधन केंद्र सुल्तानगंज तथा FLN प्रशिक्षण के विभिन्न बैचों में सैकड़ों शिक्षकों के समक्ष प्रस्तुत किया है, जहाँ अनेक शिक्षकों ने इसे तार्किक बताते हुए समर्थन भी दिया है।

रत्नेश कुमार को इससे पूर्व भी कई गणितीय शोध कार्यों—
“विभाज्यता का महासूत्र एवं दशक नियम” (2013),
“ग्रेट फार्मूला ऑफ डिविजिबिलिटी एंड डिकेड लॉ” (2014),
“विभाज्यता का तीव्रतम महासूत्र” (2017) तथा
“संख्या बटे शून्य का मान” (2020)—पर भारत सरकार से कॉपीराइट पंजीकरण प्राप्त हो चुका है।

उनके गणित संबंधी लेख विभिन्न राष्ट्रीय पत्रिकाओं जैसे सामान्य ज्ञान दर्पण, प्रतियोगिता दर्पण, पांचजन्य आदि तथा विभिन्न शैक्षणिक मंचों पर प्रकाशित हो चुके हैं।

उनका शोध राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उत्तर प्रदेश की “उद्गम” पुस्तक में भी प्रकाशित हुआ है, जिसका विमोचन माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा किया गया था।

वर्तमान में रत्नेश कुमार पूर्व माध्यमिक विद्यालय जगतपुर, सुल्तानगंज (मैनपुरी) में गणित शिक्षक तथा एआरपी (गणित) के पद पर कार्यरत हैं। वे देशभर के 100 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में अपने गणितीय सूत्रों का प्रदर्शन कर चुके हैं और उनके शैक्षणिक योगदान के लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा उन्हें आदर्श शिक्षा रत्न सम्मान, नवोदय क्रांति नेशनल अवार्ड, राष्ट्रीय धरोहर सम्मान, राष्ट्र गौरव सम्मान सहित कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। रत्नेश कुमार इस उपलब्धि का श्रेय परमपिता परमेश्वर, अपने गुरुजनों, माता-पिता तथा अपनी धर्मपत्नी सपना को देते हैं और आशा व्यक्त करते हैं कि भविष्य में उनके गणितीय तर्कों पर व्यापक अकादमिक चर्चा और अध्ययन होगा।

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