INDC Network : फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश : जनपद में जर्जर सड़कों और गहरे गड्ढों को लेकर INDC Network द्वारा पहले भी कई बार खबरें प्रकाशित की जा चुकी हैं, लेकिन शासन–प्रशासन की आंखें तब तक नहीं खुलतीं जब तक किसी निर्दोष की जान न चली जाए। ऐसा ही दर्दनाक मामला एक बार फिर सामने आया, जहां वर्षों से खतरनाक बने गड्ढे में ई-रिक्शा पलटने से एक मासूम बालिका की मौत हो गई।
नीचे नीले बॉक्स पर क्लिक करके आप हमारे द्वारा प्रकाशित ख़बरों को देख सकते हैं जब इसी चौराहे पर बने गड्डों की वजह से ट्रेक्टर पलट गया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के अंतर्गत मुरहास जसमई मार्ग पर सड़क काफी समय से क्षतिग्रस्त है। जसमई चौराहे पर गहरे गड्ढों के कारण यहां से गुजरने वाले वाहन अक्सर असंतुलित हो जाते हैं। इसी मार्ग पर पहले भी कई बार ट्रैक्टर और अन्य वाहन पलट चुके हैं। कुछ माह पूर्व इसी स्थान पर एक महिला का हाथ टूट गया था, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
बताया जा रहा है कि मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के मोहल्ला बजरिया मालवी बदन खां निवासी आनंद श्रीवास्तव की पत्नी शिल्पी दोपहर लगभग ढाई बजे अपने मायके कन्नौज जाने के लिए बच्चों के साथ ई-रिक्शा से रेलवे स्टेशन जा रही थीं।
जसमई के पास पहुंचते ही सड़क पर बने गहरे गड्ढे में ई-रिक्शा असंतुलित होकर पलट गया। ई-रिक्शा पलटने से वंशिका (21), अंशिका (18), आरफ (13) और तेजस्वी (8) दब गए। हादसे में तेजस्वी नीचे गिर गई और उसी के ऊपर ई-रिक्शा पलट गया, जिससे उसके सिर और शरीर में गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों की मदद से ई-रिक्शा को सीधा कर घायलों को बाहर निकाला गया। तेजस्वी को गंभीर अवस्था में निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं अन्य परिजन बाल-बाल बच गए।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की लापरवाही पर खड़ा होता है। INDC Network के संपादक अर्पित शाक्य द्वारा पिछले दिनों इस जर्जर सड़क और खतरनाक गड्ढों को लेकर मुद्दा उठाया गया था, लेकिन तब भी जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंदे रखीं। आज जब एक मासूम की जान चली गई, तब प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में सड़क की मरम्मत शुरू करा दी गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सड़क की मरम्मत कर दी जाती, तो आज एक बच्ची की जान नहीं जाती। यह घटना प्रशासनिक संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण है।