INDC Network : महाराष्ट्र :- Shiv Sena UBT के मुखपत्र Saamana ने शेयर बाजार में आई गिरावट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। संपादकीय में पश्चिम एशिया तनाव, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बताया गया
महाराष्ट्र में Shiv Sena UBT के मुखपत्र Saamana ने भारतीय शेयर बाजार में आई हालिया गिरावट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। संपादकीय में कहा गया कि बाजार में आई भारी गिरावट से निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है और इससे सरकार के 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर भी सवाल खड़े होते हैं।
सोमवार 23 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान BSE Sensex करीब 1,800 अंकों तक गिर गया, जबकि NIFTY 50 22 हजार के नीचे चला गया। इस गिरावट के चलते निवेशकों के लगभग 11 लाख करोड़ रुपये डूबने का अनुमान जताया गया। इस घटनाक्रम ने बाजार और निवेशकों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय “11 लाख करोड़ का भूकंप… क्या हिल जाएगी सरकार” शीर्षक के साथ केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए गए हैं। लेख में कहा गया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेशकों के भरोसे पर पड़ रहा है। विशेष रूप से Iran–United States tensions के बढ़ते प्रभाव को बाजार गिरावट की प्रमुख वजह बताया गया है।
संपादकीय में यह भी उल्लेख किया गया कि Strait of Hormuz से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण भारत के ऊर्जा आयात पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर उद्योगों की उत्पादन लागत पर पड़ने और आर्थिक गतिविधियों के धीमा होने की संभावना जताई गई है।
लेख में कहा गया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने बाजार की स्थिति और कमजोर कर दी है। पिछले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों द्वारा करीब 1 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचने का दावा किया गया है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी को भी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बताया गया है।
संपादकीय में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi के 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर तंज कसते हुए कहा गया कि यदि वैश्विक तनाव और बाजार की अनिश्चितता बनी रहती है, तो इसका असर भारत की आर्थिक विकास दर और निवेश माहौल पर पड़ सकता है। लेख में यह भी सवाल उठाया गया कि सरकार विदेशी निवेश में गिरावट और रुपये की कमजोरी जैसी चुनौतियों से कैसे निपटेगी।
‘सामना’ के अनुसार, पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी संघर्ष और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर भारत के औद्योगिक और वित्तीय क्षेत्रों पर पड़ रहा है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है, तो इसका प्रभाव देश की जीडीपी वृद्धि दर पर भी दिखाई दे सकता है। इस संपादकीय के जरिए विपक्ष ने केंद्र सरकार से आर्थिक स्थिति पर स्पष्ट रणनीति पेश करने की मांग की है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| मुद्दा | शेयर बाजार में गिरावट |
| सेंसेक्स गिरावट | लगभग 1,800 अंक |
| निफ्टी स्तर | 22,000 के नीचे |
| अनुमानित नुकसान | ₹11 लाख करोड़ |
| प्रमुख कारण | पश्चिम एशिया तनाव, FPI बिकवाली |
| अतिरिक्त असर | रुपये की कमजोरी |
| संपादकीय | सामना |
| राजनीतिक प्रतिक्रिया | शिवसेना (यूबीटी) का हमला |
| लक्ष्य पर सवाल | 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था |
| संभावित असर | निवेश और जीडीपी वृद्धि पर दबाव |
शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ ने शेयर बाजार में आई भारी गिरावट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य और रुपये की कमजोरी पर सवाल उठाए हैं।



















