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फर्रुखाबाद में अध्यात्म पर प्रेस कॉन्फ्रेंस: हरियाणा से आए संजय पराशर ने सनातन धर्म पर रखे विचार

INDC Network : फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद में आयोजित रामनगरिया मेला इस वर्ष केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अध्यात्म, दर्शन और सनातन पर विमर्श का भी केंद्र बना। इसी क्रम में हरियाणा से आए अध्यात्म को समझने और जीने वाले संजय पराशर ने रामनगरिया मेला परिसर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने जीवन, अध्यात्म की यात्रा और सनातन धर्म से जुड़े विचारों को पत्रकारों के साथ साझा किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय पराशर ने बताया कि उनके जीवन की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में हुई थी। शुरुआती दिनों में वे शिक्षा जगत से जुड़े रहे और विशेष रूप से अंग्रेजी विषय का अध्यापन किया। उन्होंने कहा कि अध्यापन के दौरान ही उनके मन में जीवन, समाज और आत्मा से जुड़े कई प्रश्न उत्पन्न होने लगे। इन्हीं प्रश्नों ने धीरे-धीरे उन्हें आत्ममंथन की ओर प्रेरित किया। कुछ समय बाद उनका “हृदय परिवर्तन” हुआ और उन्होंने सांसारिक जीवन से हटकर अध्यात्म की राह पर चलने का निर्णय लिया।

संजय पराशर ने बताया कि उन्हें अध्यात्म की ओर बढ़ते हुए लगभग 15 वर्ष हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने सनातन धर्म से संबंधित अनेक ग्रंथों, दर्शनों और विषयों का अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि सनातन केवल एक पूजा-पद्धति नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक शाश्वत प्रक्रिया है, जो मानव को सत्य, करुणा और आत्मज्ञान की ओर ले जाती है।

रामनगरिया मेला को लेकर उन्होंने कहा कि यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अध्यात्म और धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। संजय पराशर के अनुसार फर्रुखाबाद जनपद स्वयं में एक विशेष आध्यात्मिक पहचान रखता है। उन्होंने जनपद को “अपर काशी” की संज्ञा देते हुए कहा कि जिस प्रकार प्रयागराज का धार्मिक महत्व है, उसी प्रकार फर्रुखाबाद भी प्राचीन काल से आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रहा है।

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए संजय पराशर ने कहा कि दोनों ही प्रदेश सनातन परंपरा से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा की भूमि पर स्थित कुरुक्षेत्र वह स्थान है, जहां महाभारत का महायुद्ध हुआ था और जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया। वहीं उत्तर प्रदेश में अयोध्या, मथुरा और वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्र स्थित हैं। अयोध्या भगवान श्रीराम की नगरी है, मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है और वाराणसी भगवान शिव की नगरी के रूप में जानी जाती है। संजय पराशर ने कहा कि ये तीनों नगर सनातन धर्म के मुख्य स्तंभ हैं और इनके साथ फर्रुखाबाद को जोड़कर देखा जाना चाहिए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने गीता पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह कर्म, धर्म और जीवन के संतुलन का दर्शन प्रस्तुत करती है। गीता के उपदेश आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने महाभारत काल में थे।

जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या सनातन धर्म और हिंदू धर्म एक ही हैं, तो संजय पराशर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सनातन धर्म अलग है और “हिंदू” कोई धर्म नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द एक पहचान है, जिसे ऐतिहासिक रूप से अंग्रेजों द्वारा प्रचलित किया गया, जबकि वास्तविक और शाश्वत धर्म सनातन ही है। इस पर पत्रकारों ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने भी इसी प्रकार की बात कही थी। संजय पराशर ने कहा कि वे इस विचार से सहमत हैं और मानते हैं कि सनातन धर्म ही भारत की मूल आत्मा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के समापन पर संजय पराशर ने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक हो सकता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे उत्तर प्रदेश को केवल राजनीतिक या सामाजिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सनातन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में भी समझें। इसी संदेश के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस का समापन हुआ।

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