INDC Network : लखनऊ, उत्तर प्रदेश : स्वामी प्रसाद मौर्य ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान पर कड़ा पलटवार किया है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “जिसके हृदय में भारत भक्ति नहीं है, वह हिंदू नहीं हो सकता” जैसे बयान बेहद आपत्तिजनक और विरोधाभासी हैं।
R.S.S. प्रमुख श्री मोहन भागवत द्वारा दिया गया बयान कि "जिसके हृदय में भारत भक्ति नहीं है, वह हिंदू नहीं हो सकता" बहुत ही अजीबो–गरीब और उलटवासी है, क्योंकि जो लोग कभी अपने कार्यालय पर तिरंगा झंडा तक नहीं फहराने थे वही आज “भारत भक्ति” का लाइसेंस बांट रहे हैं। वैसे भी जिसके हृदय में…
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने पोस्ट में लिखा कि मोहन भागवत का यह कथन बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और आत्मघाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हिंदू होने की शर्त भारत भक्ति है, तो फिर आज भारत को लूटने वाले, गरीबों का शोषण करने वाले और नफरत फैलाने वाले लोग किस श्रेणी में आएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि आज देश में “भारत भक्ति” का लाइसेंस कुछ चुनिंदा लोगों के हाथ में देने की कोशिश की जा रही है। मौर्य के अनुसार, जो लोग दिन-रात नफरत फैलाते हैं और समाज को बांटने का काम करते हैं, वे खुद को सबसे बड़ा हिंदू बताने का दावा करते हैं, जबकि वास्तविक हिंदुत्व मानवता, समरसता और भाईचारे की शिक्षा देता है।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने आगे तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई सच में हिंदू होता है, तो वह समाज में नफरत और हिंसा नहीं फैलाता। उन्होंने मोहन भागवत से यह भी सवाल किया कि क्या नफरत, भेदभाव और शोषण ही अब हिंदू होने की पहचान बन गई है।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर धर्म, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को लेकर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी स्वामी प्रसाद मौर्य की प्रतिक्रिया तेजी से वायरल हो रही है और लोग इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
फिलहाल, मोहन भागवत के बयान और उस पर स्वामी प्रसाद मौर्य की प्रतिक्रिया ने देश में वैचारिक टकराव को और गहरा कर दिया है, जिस पर आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।