INDC Network: लखनऊ, उत्तर प्रदेश :- नगीना सांसद ने जनगणना में OBC वर्गीकरण और धर्म आधारित आंकड़ों की मांग उठाई नगीना से सांसद Chandrashekhar Azad ने 2027 में प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना को लेकर भारतीय महानिबंधक एवं जनगणना आयुक्त को पत्र लिखकर OBC वर्गीकरण, विमुक्त जनजातियों और धर्म आधारित आंकड़ों के निष्पक्ष अभिलेखन की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनगणना नीति निर्माण और संसाधन वितरण की आधारशिला है।
जनगणना को लेकर सांसद की चिट्ठी
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना लोकसभा सीट से सांसद Chandrashekhar Azad ने वर्ष 2027 में प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना के संबंध में महत्वपूर्ण बिंदुओं को उठाते हुए भारतीय महानिबंधक एवं जनगणना आयुक्त को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को अब तक जनगणना में पृथक रूप से वर्गीकृत नहीं किया गया है। साथ ही जाति गणना की स्पष्ट पद्धति भी अब तक घोषित नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि इस विषय को वे 11 फरवरी 2026 को लोकसभा में भी उठा चुके हैं।
OBC और विमुक्त जनजातियों का मुद्दा
सांसद ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि पूर्व की जनगणनाओं में जनजातीय आंकड़े केवल अनुसूचित जनजाति (ST) सूची तक सीमित रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ST सूची से बाहर की जनजातियों को भी अलग से वर्गीकृत और दर्ज किया जाए। उनका कहना है कि यदि ऐसा किया जाता है तो 10 करोड़ से अधिक आबादी वाले विमुक्त जनजाति (Denotified Tribes) समुदायों को दशकों से झेल रहे सामाजिक और प्रशासनिक उपेक्षा से राहत मिल सकती है।
धर्म आधारित आंकड़ों पर जोर
चंद्रशेखर आजाद ने अपने पत्र में धर्म के प्रश्न को संवेदनशील बताते हुए कहा कि वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में यह और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि जनगणना में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समूहों का सटीक और निष्पक्ष अभिलेखन किया जाए। उन्होंने लिखा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि नीति-निर्माण, संसाधनों के वितरण और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की नींव है। इसलिए इसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता राष्ट्रहित में अत्यंत आवश्यक है।
| क्रम संख्या | मुद्दा | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | OBC वर्गीकरण | जनगणना में OBC को पृथक श्रेणी में दर्ज किया जाए |
| 2 | जाति गणना पद्धति | स्पष्ट और घोषित प्रक्रिया लागू की जाए |
| 3 | विमुक्त जनजातियां | ST सूची से बाहर की जनजातियों का भी वर्गीकरण |
| 4 | धर्म आधारित आंकड़े | सभी धार्मिक व सामाजिक समूहों का निष्पक्ष अभिलेखन |
| 5 | पारदर्शिता | संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप निष्पक्ष प्रक्रिया |
लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आधारशिला
आसपा (कांशीराम) नेता ने अपने पत्र के अंत में उम्मीद जताई कि जनगणना का कार्य संवैधानिक मूल्यों और उच्च प्रशासनिक मानकों के अनुरूप संपन्न होगा। उन्होंने इसे राष्ट्रहित से जुड़ा विषय बताते हुए पारदर्शी और पेशेवर तरीके से पूरा करने की अपील की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी जनगणना को लेकर देशभर में सामाजिक और राजनीतिक विमर्श तेज हो सकता है, विशेषकर जाति आधारित आंकड़ों और OBC वर्गीकरण के मुद्दे पर। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 2027 की राष्ट्रीय जनगणना को लेकर OBC वर्गीकरण, विमुक्त जनजातियों और धर्म आधारित सटीक आंकड़ों की मांग उठाई है। उन्होंने जनगणना को नीति निर्माण और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की आधारशिला बताते हुए पारदर्शिता पर जोर दिया



















