INDC Network: नई दिल्ली, भारत:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट को देश की युवा शक्ति और तकनीकी प्रगति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए भारत की ज्ञान परंपरा और नवाचार क्षमता को रेखांकित किया।
भारत में आयोजित “इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट” ने वैश्विक तकनीकी समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विश्व भर से आए नेताओं, नवप्रवर्तकों और तकनीकी विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए इसे भारत के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है, बल्कि देश के युवाओं की अपार संभावनाओं का भी प्रमाण है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्ट-अप इकोसिस्टम, अनुसंधान संस्थान और युवा नवाचारकर्ता दुनिया को नई दिशा दे रहे हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में दुनियाभर से प्रतिभागियों का आना इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल एक उपभोक्ता देश नहीं, बल्कि तकनीकी समाधान देने वाला अग्रणी राष्ट्र बन रहा है। उन्होंने इसे “न्यू इंडिया” की पहचान बताया, जहां युवा प्रतिभा, नवाचार और डिजिटल परिवर्तन विकास की धुरी हैं।AI के क्षेत्र में भारत ने हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। डिजिटल इंडिया अभियान, स्टार्ट-अप इंडिया, और कौशल विकास कार्यक्रमों ने तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समिट वैश्विक सहयोग, अनुसंधान साझेदारी और जिम्मेदार एआई विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संस्कृत सुभाषित के माध्यम से संदेश
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर संस्कृत का एक प्राचीन श्लोक साझा किया:
“दाने तपसि शौचं च विज्ञानं विनये नये।
विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा।।”
इस श्लोक का आशय है कि दान, तप, पवित्रता, विज्ञान, विनय और नीति जैसे गुण इस पृथ्वी पर अनेक स्थानों पर पाए जाते हैं, इसलिए किसी एक स्थान पर इन गुणों की उपस्थिति पर आश्चर्य नहीं करना चाहिए।प्रधानमंत्री ने इस श्लोक के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की धरती सदा से ज्ञान और नवाचार की भूमि रही है, और आज वही परंपरा आधुनिक तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ रही है।
युवाओं की शक्ति पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। देश के करोड़ों युवा एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और अन्य उभरती तकनीकों में नवाचार कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक एआई विकास में अग्रणी भूमिका निभाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए। एआई के विकास में नैतिकता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
| क्रमांक | विषय | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | आयोजन | इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट |
| 2 | प्रधानमंत्री का संदेश | युवा शक्ति और तकनीकी प्रगति पर जोर |
| 3 | वैश्विक भागीदारी | विश्वभर से नेता और विशेषज्ञ शामिल |
| 4 | मुख्य फोकस | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार |
| 5 | संस्कृत श्लोक | प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय |
| 6 | लक्ष्य | जिम्मेदार और समावेशी एआई विकास |
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट भारत की तकनीकी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश ने यह स्पष्ट किया कि भारत न केवल तकनीकी प्रगति कर रहा है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा को भी साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। युवा शक्ति, नवाचार और वैश्विक सहयोग के माध्यम से भारत भविष्य की तकनीकी क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।


















