INDC Network: नई दिल्ली: भारत : महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल यौन शोषण से निपटने के लिए एक सुदृढ़ कानूनी और संस्थागत ढांचा विकसित किया है। पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को विशेष कानूनी संरक्षण दिया गया है और स्कूल अधिकारियों सहित सभी के लिए अपराध की अनिवार्य रिपोर्टिंग का प्रावधान है। किशोर न्याय अधिनियम, मिशन वात्सल्य, बाल कल्याण समितियां, विशेष किशोर पुलिस इकाइयां और फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट जैसे तंत्रों के माध्यम से त्वरित जांच, संवेदनशील प्रक्रिया और शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जा रहा है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में दी।महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल यौन शोषण से निपटने के लिए एक सुदृढ़ कानूनी और संस्थागत ढांचा विकसित किया है। पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को विशेष कानूनी संरक्षण दिया गया है और स्कूल अधिकारियों सहित सभी के लिए अपराध की अनिवार्य रिपोर्टिंग का प्रावधान है। किशोर न्याय अधिनियम, मिशन वात्सल्य, बाल कल्याण समितियां, विशेष किशोर पुलिस इकाइयां और फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट जैसे तंत्रों के माध्यम से त्वरित जांच, संवेदनशील प्रक्रिया और शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जा रहा है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में दी।
स्कूलों में अनिवार्य रिपोर्टिंग का प्रावधान
पॉक्सो अधिनियम के तहत स्कूल प्रबंधन, शिक्षक और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के लिए ऐसे अपराधों की अनिवार्य रिपोर्टिंग का प्रावधान किया गया है। यदि किसी विद्यालय में शारीरिक या यौन हिंसा की घटना होती है तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना देना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, समयबद्ध जांच और प्राथमिकी दर्ज करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप स्कूल सुरक्षा एवं संरक्षा संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई और सुधारात्मक कदम उठाना अनिवार्य है।
संस्थागत तंत्र को मजबूती
बाल संरक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act के तहत विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं। इनमें बाल कल्याण समितियां (CWC), जिला बाल संरक्षण इकाइयां (DCPU) और विशेष किशोर पुलिस इकाइयां (SJPU) शामिल हैं।मिशन वात्सल्य के अंतर्गत एकीकृत बाल संरक्षण ढांचे के माध्यम से त्वरित रिपोर्टिंग, मामलों की निगरानी और बाल संरक्षण एजेंसियों के बीच समन्वय को बढ़ावा दिया जा रहा है।
एनसीपीसीआर की भूमिका
National Commission for Protection of Child Rights को बाल अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों की जांच और निगरानी का अधिकार प्राप्त है। आयोग ने वर्ष 2019 में विद्यालयों के लिए सुरक्षा नियमावली जारी की थी और 2021 में व्यापक ‘विद्यालय सुरक्षा’ दिशानिर्देश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनाने हेतु भेजे।एनसीपीसीआर की ऑनलाइन शिकायत प्रणाली (ई-बॉक्स/पॉक्सो ई-बॉक्स) के माध्यम से मामलों की निगरानी की जाती है तथा अनुपालन न होने पर संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।
न्यायिक तंत्र और फास्ट ट्रैक कोर्ट
बाल यौन शोषण के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना लागू की है। 30 नवंबर 2025 तक 29 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 774 एफटीएससी कार्यरत हैं, जिनमें 398 विशेष पॉक्सो न्यायालय शामिल हैं। इन न्यायालयों ने अब तक 3,61,055 मामलों का निपटारा किया है।
क्षमता निर्माण और जागरूकता
सरकार नियमित रूप से पुलिस कर्मियों, विद्यालय अधिकारियों, न्यायाधीशों और लोक अभियोजकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है। साथ ही, साइबर फोरेंसिक सुविधाओं को मजबूत करने और ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित करने जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
प्रमुख प्रावधान और आंकड़े (तालिका)
| क्रमांक | पहल/कानून | मुख्य उद्देश्य | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|---|
| 1 | पॉक्सो अधिनियम, 2012 | बच्चों को यौन अपराधों से कानूनी संरक्षण | अनिवार्य रिपोर्टिंग और बाल-हितैषी प्रक्रिया |
| 2 | किशोर न्याय अधिनियम, 2015 | देखभाल एवं संरक्षण तंत्र | CWC, DCPU, SJPU सक्रिय |
| 3 | मिशन वात्सल्य | एकीकृत बाल संरक्षण ढांचा | राज्यों में लागू |
| 4 | एनसीपीसीआर दिशानिर्देश | विद्यालय सुरक्षा सुनिश्चित करना | 2019 व 2021 दिशानिर्देश जारी |
| 5 | फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट | मामलों का त्वरित निपटारा | 774 कोर्ट, 3,61,055 मामले निपटा |
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा तैयार किया गया यह व्यापक कानूनी एवं संस्थागत ढांचा बच्चों को यौन शोषण से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अनिवार्य रिपोर्टिंग, बाल-हितैषी न्याय प्रक्रिया, संस्थागत समन्वय और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदम सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।



















