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बढ़ते प्रदूषण के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, सरकार की बहुस्तरीय योजनाएं

INDC Network: नई दिल्ली: भारत:देश के प्रमुख शहरों में बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। एफएएमई-II, पीएम ई-ड्राइव, पीएलआई-ऑटो, पीएलआई-एसीसी और प्रधानमंत्री ई-बस सेवा जैसी पहलों के माध्यम से न केवल ईवी खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है, बल्कि घरेलू विनिर्माण, बैटरी उत्पादन और चार्जिंग ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है। राज्यसभा में भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजु श्रीनिवास वर्मा ने बताया कि अब तक 29,151 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं।देश के महानगरों में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है। राज्यसभा में लिखित उत्तर देते हुए भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजु श्रीनिवास वर्मा ने बताया कि सरकार ने ईवी को किफायती और सुलभ बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं।

एफएएमई-II योजना से मिली रफ्तार

भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा लागू FAME India Scheme Phase II (1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024) के तहत 11,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। इस योजना के अंतर्गत ई-2W, ई-3W और ई-4W वाहनों को प्रोत्साहन दिया गया तथा ई-बसों और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए सहायता प्रदान की गई।इस योजना से लगभग 16.71 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा मिला और 6,862 ई-बसों को मंजूरी दी गई। 7 फरवरी 2026 तक 5,195 ई-बसें परिचालन में आ चुकी हैं।

पीएम ई-ड्राइव और ई-बस सेवा

29 सितंबर 2024 को अधिसूचित PM Electric Drive Innovative Vehicle Enhancement Scheme (PM E-DRIVE) योजना के तहत 10,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य 28.27 लाख ईवी (दो, तीन, चार पहिया, ई-ट्रक, ई-बस, ई-एम्बुलेंस) को प्रोत्साहन देना है।योजना के तहत 14,028 ई-बसों की तैनाती के लिए 4,391 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें से 13,800 बसें दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत जैसे बड़े शहरों में लगाई जा रही हैं।इसके अतिरिक्त, PM e-Bus Sewa Payment Security Mechanism योजना (3,435.33 करोड़ रुपये) सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों द्वारा भुगतान में चूक की स्थिति में ई-बस संचालकों को सुरक्षा प्रदान करेगी।

विनिर्माण और बैटरी उत्पादन पर जोर

सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए PLI Scheme for Automobile and Auto Components के तहत 25,938 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसका उद्देश्य उन्नत मोटर वाहन तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को बढ़ावा देना है।वहीं, उन्नत रसायन सेल बैटरी निर्माण के लिए PLI Scheme for Advanced Chemistry Cell के तहत 18,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे 50 गीगावॉट एसीसी बैटरी निर्माण क्षमता विकसित की जा सके।बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) को भी पीएलआई-ऑटो योजना के अंतर्गत पात्र उत्पादों में शामिल किया गया है।

कर रियायत और सब्सिडी

सरकार ने ईवी की लागत कम करने के लिए कई कर रियायतें दी हैं:

  • ईवी पर जीएसटी 12% से घटाकर 5%
  • चार्जिंग स्टेशन पर जीएसटी 18% से घटाकर 5%
  • राज्यों को सड़क कर और पंजीकरण शुल्क माफ करने की सलाह
  • पीएम ई-ड्राइव के तहत प्रत्यक्ष सब्सिडी

चार्जिंग ढांचा मजबूत

बीएचईएल से प्राप्त जानकारी के अनुसार देश में 29,151 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत चार्जिंग ढांचे के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।


प्रमुख योजनाएं और आंकड़े (तालिका)

योजना का नामबजट (₹ करोड़)मुख्य उद्देश्यवर्तमान स्थिति
FAME-II11,500ईवी प्रोत्साहन, ई-बस, चार्जिंग स्टेशन16.71 लाख ईवी, 5,195 बसें चालू
PM E-DRIVE10,90028.27 लाख ईवी को प्रोत्साहन14,028 ई-बसें स्वीकृत
PLI-Auto25,938उन्नत ऑटो तकनीक निर्माणघरेलू उत्पादन प्रोत्साहन
PLI-ACC18,10050 GWh बैटरी निर्माणएसीसी पारिस्थितिकी तंत्र
PM e-Bus Sewa (PSM)3,435.33ई-बस भुगतान सुरक्षा38,000+ बस लक्ष्य

सरकार द्वारा लागू की गई इन बहुआयामी योजनाओं का उद्देश्य न केवल प्रदूषण में कमी लाना है, बल्कि भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना भी है। सब्सिडी, कर राहत, घरेलू उत्पादन और चार्जिंग अवसंरचना के विकास के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों को आम जनता के लिए किफायती और सुलभ बनाया जा रहा है।

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एफएएमई-II, पीएम ई-ड्राइव, पीएलआई-ऑटो और पीएलआई-एसीसी जैसी योजनाएं लागू की हैं। ईवी खरीद पर सब्सिडी, जीएसटी में कटौती, घरेलू विनिर्माण और चार्जिंग ढांचे को मजबूत कर सरकार हरित और स्वच्छ परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

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