हाईकोर्ट ने यह आदेश दशरथ यादव समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया। याचिकाओं में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने की मांग की गई थी। अदालत ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को चुनाव की तैयारियां तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत होंगे चुनाव
अदालत के आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने कहा है कि पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए मौजूदा 27 प्रतिशत आरक्षण समेत लागू आरक्षण व्यवस्था के तहत चुनाव कराए जाएं। केवल डेडिकेटेड बैकवर्ड क्लासेज कमीशन की जांच या रिपोर्ट लंबित होने के आधार पर चुनाव प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए लागू आरक्षण व्यवस्था कानून के अनुसार जारी रहेगी।
निवर्तमान ग्राम प्रधान बने रहेंगे प्रशासक
हाईकोर्ट ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के राज्य सरकार के फैसले को रद्द नहीं किया है। पंचायत चुनाव संपन्न होने तक वे प्रशासक के रूप में कार्य करते रहेंगे। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्थायी प्रशासन की व्यवस्था निर्वाचित स्थानीय निकायों का स्थायी विकल्प नहीं बन सकती।
उत्तर प्रदेश में 2021 में निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी दी थी। इसी व्यवस्था और पंचायत चुनाव में देरी को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
अब चुनावी तैयारियों में आएगी तेजी
हाईकोर्ट के तीन महीने में चुनाव कराने के निर्देश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग और प्रशासन के सामने चुनाव प्रक्रिया को समयसीमा के भीतर पूरा करने की चुनौती है। आरक्षण, मतदाता सूची, चुनाव कार्यक्रम और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना होगा। वहीं, प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है।
अदालत के आदेश के बाद अब पंचायत चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता काफी हद तक दूर हुई है। हालांकि चुनाव की सटीक तारीखों की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आधिकारिक कार्यक्रम जारी किए जाने के बाद ही होगी।