INDC Network : देश-विदेश : भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी के समापन के बाद उन्हें सम्मानपूर्वक श्रीलंका से भारत वापस लाया गया। कोलंबो के प्रतिष्ठित गंगारामया मंदिर में आयोजित इस सात दिवसीय सार्वजनिक दर्शन कार्यक्रम में अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। आयोजकों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र अवशेषों के दर्शन किए, जिससे यह आयोजन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ऐतिहासिक बन गया।
इन अवशेषों को पहली बार अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए विदेश भेजा गया था। यह कदम भारत और श्रीलंका के बीच गहरे आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाता है। प्रदर्शनी के समापन पर भंडारनायके अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर औपचारिक प्रस्थान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और बौद्ध भिक्षु उपस्थित रहे।
भारत की ओर से मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल और अरुणाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री चोवना मीन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों को स्वदेश वापस लाया। इस अवसर पर श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त और श्रीलंकाई मंत्रियों ने भी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रदर्शनी का उद्घाटन श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने किया। उद्घाटन समारोह में भारत की ओर से गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी शामिल हुए। श्रीलंका सरकार ने इस आयोजन के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह प्रदर्शनी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं थी, बल्कि भारत और श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत और सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत उदाहरण बनी। कार्यक्रम के दौरान “पवित्र पिपरावा का अनावरण” और “समकालीन भारत के पवित्र अवशेष और सांस्कृतिक जुड़ाव” जैसी विशेष प्रदर्शनियों का भी आयोजन किया गया। इन प्रदर्शनों ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और आध्यात्मिक आदान-प्रदान को दर्शाया।
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान इस प्रदर्शनी की घोषणा की गई थी। उसी घोषणा का परिणाम यह ऐतिहासिक आयोजन रहा, जिसने भारत को वैश्विक बौद्ध विरासत के संरक्षक के रूप में और अधिक सुदृढ़ किया।
नीचे प्रदर्शनी से जुड़े प्रमुख तथ्य प्रस्तुत हैं:
| क्रमांक | विवरण | जानकारी |
|---|---|---|
| 1 | आयोजन स्थल | गंगारामया मंदिर, कोलंबो |
| 2 | अवधि | 7 दिन |
| 3 | कुल श्रद्धालु | 10 लाख से अधिक |
| 4 | उद्घाटनकर्ता | राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके |
| 5 | भारतीय प्रतिनिधिमंडल नेतृत्व | मंगुभाई पटेल, चोवना मीन |
| 6 | विशेष प्रदर्शनियाँ | पवित्र पिपरावा, सांस्कृतिक जुड़ाव प्रदर्शनी |
| 7 | घोषणा | अप्रैल 2025, पीएम मोदी की श्रीलंका यात्रा |
इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि बौद्ध धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक सेतु है। अवशेषों की यह वापसी श्रद्धा, सम्मान और कूटनीतिक सद्भाव का प्रतीक बनकर सामने आई। भारत और श्रीलंका के बीच यह आध्यात्मिक अध्याय भविष्य में और भी मजबूत सांस्कृतिक साझेदारी का मार्ग प्रशस्त करेगा।



















