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गुरुग्राम में नाबालिगों पर अत्याचार: एनएचआरसी ने लिया स्वतः संज्ञान, पुलिस को नोटिस

INDC Network : नई दिल्ली, भारत : गुरुग्राम में नाबालिगों को बंधक बनाकर यौन उत्पीड़न मामले में एनएचआरसी की सख्त कार्रवाई

हरियाणा के गुरुग्राम स्थित डीएलएफ फेज-तीन इलाके में चोरी के संदेह में पांच नाबालिग बच्चों को 18 घंटे तक बंधक बनाकर रखने, निर्वस्त्र करने, यौन उत्पीड़न और प्रताड़ना देने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे बच्चों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया और गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं

हरियाणा के गुरुग्राम जिले के डीएलएफ फेज-तीन क्षेत्र में एक निर्माणाधीन इमारत में पांच नाबालिग बच्चों के साथ हुई बर्बरता की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस गंभीर मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन बच्चों की उम्र 11 से 14 वर्ष के बीच है। आरोप है कि एक ठेकेदार और उसके चार मजदूरों ने निर्माण सामग्री चोरी के संदेह में इन बच्चों को 18 घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस दौरान बच्चों को निर्वस्त्र किया गया, उनके साथ यौन उत्पीड़न किया गया और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने बच्चों पर पेट्रोल डालकर उन्हें और अधिक डराने-धमकाने की कोशिश भी की।

एनएचआरसी ने इस मामले को बच्चों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में दिए गए तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल कानून के विरुद्ध है, बल्कि समाज की नैतिकता और संवेदनशीलता पर भी गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, जब बच्चों की माताएं घटनास्थल पर पहुंचीं, तो आरोपियों ने उन्हें भी बच्चों के साथ बैठा दिया और उनका अपमान किया। यह घटना तब सामने आई जब पीड़ित बच्चों में से एक की मां ने 3 फरवरी 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और मीडिया के माध्यम से यह जानकारी सामने आई।

5 फरवरी 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया कि पीड़ित परिवार बेहद सदमे में हैं और बच्चों की मानसिक स्थिति भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

एनएचआरसी द्वारा गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को जारी नोटिस में कहा गया है कि मामले की विस्तृत जांच कर आयोग को समय सीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए, ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि पीड़ित बच्चों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल बच्चों के भविष्य पर गहरा असर डालती हैं, बल्कि समाज में कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि समाज के कमजोर वर्ग, विशेषकर बच्चे, अब भी असुरक्षित हैं और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और समाज को मिलकर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। एनएचआरसी की यह कार्रवाई पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


घटना से जुड़ा प्रमुख डेटा

क्रम संख्याविवरणजानकारी
1घटना का स्थानडीएलएफ फेज-तीन, गुरुग्राम, हरियाणा
2पीड़ितों की संख्या5 नाबालिग बच्चे
3पीड़ितों की उम्र11 से 14 वर्ष
4बंधक बनाए जाने की अवधिलगभग 18 घंटे
5मुख्य आरोपबंधक बनाना, यौन उत्पीड़न, प्रताड़ना
6आरोपीएक ठेकेदार और उसके चार मजदूर
7शिकायत की तारीख3 फरवरी 2026
8मीडिया रिपोर्ट की तारीख5 फरवरी 2026
9आयोग की कार्रवाईस्वतः संज्ञान, पुलिस को नोटिस
10रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा2 सप्ताह

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