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ईरान युद्ध में बढ़ा तनाव, अमेरिका-ईरान टकराव के बीच खाड़ी क्षेत्र पर बढ़ा संकट

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध छह महीने से अधिक समय बाद भी खत्म नहीं हुआ है। ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
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ईरान युद्ध में बढ़ा तनाव, अमेरिका-ईरान टकराव के बीच खाड़ी क्षेत्र पर बढ़ा संकट
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INDC Network : World News : अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने सितंबर 2026 में भी पश्चिम एशिया की स्थिति को तनावपूर्ण बना रखा है। Reuters के अनुसार, संघर्ष छह महीने से अधिक समय से जारी है और इसके बीच ईरान, अमेरिका तथा उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच सैन्य टकराव लगातार बना हुआ है। युद्ध का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यमन, सऊदी अरब और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा तथा वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है।

ईरान-अमेरिका के बीच लगातार सैन्य टकराव

सितंबर की शुरुआत में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले किए थे, जिसके बाद ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्र में अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की कार्रवाई की। Reuters ने इसे कई सप्ताह में संघर्ष का सबसे गंभीर सैन्य उभार बताया था।

इसके बाद संघर्ष का दायरा और बढ़ा। ईरान समर्थित हूती समूह की गतिविधियों के कारण लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में भी तनाव बढ़ा है। 8 सितंबर की Reuters रिपोर्ट के मुताबिक, हूती हमलों ने सऊदी अरब के कई शहरों को प्रभावित किया और तेल प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचा।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा

युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने कहा है कि वह कुछ शर्तें पूरी होने तक जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोलेगा।

होर्मुज में किसी भी लंबे व्यवधान का असर कच्चे तेल की आपूर्ति, परिवहन लागत और दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। इसी वजह से युद्ध की स्थिति पर वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है।

ईरान ने बातचीत के लिए रखीं शर्तें

20 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए कई शर्तें रखी हैं। इनमें युद्ध रोकना, जमे हुए ईरानी फंड को जारी करना और समुद्री नाकाबंदी हटाना जैसी मांगें शामिल बताई गई हैं। ईरान के अधिकारी ने यह भी कहा है कि शर्तें स्वीकार नहीं होने पर उनका देश संघर्ष को और निर्णायक चरण में ले जाने के लिए तैयार है। ये दावे ईरानी अधिकारी के बयानों पर आधारित हैं।

युद्ध का आर्थिक असर भी बढ़ रहा

अमेरिका-ईरान युद्ध का आर्थिक असर भी सामने आ रहा है। AP के अनुसार, 3 सितंबर 2026 तक अमेरिकी युद्ध लागत का अनुमान बढ़कर 43.6 अरब डॉलर हो गया था। इस दौरान अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने और क्षेत्र में सैन्य ठिकानों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमलों की भी रिपोर्ट सामने आई है।

इसी बीच, अफगान नागरिकों के ईरान से वापस लौटने की समस्या भी बढ़ी है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध और आर्थिक संकट के बीच कई अफगान प्रवासी ईरान छोड़कर अफगानिस्तान लौट रहे हैं, जबकि ईरान में उपभोक्ता कीमतों में सालाना लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

संघर्ष खत्म होने के संकेत अभी स्पष्ट नहीं

संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दुनिया के कई नेता पश्चिम एशिया के संघर्ष पर चर्चा करने वाले हैं। Reuters के अनुसार, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के साथ यमन तथा क्षेत्र के अन्य हिस्सों में तनाव भी अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

फिलहाल युद्धविराम और स्थायी राजनीतिक समाधान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक तरफ ईरान बातचीत के लिए शर्तें रख रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और जवाबी कार्रवाई जारी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसके प्रभाव पर नजर बनी रहेगी।