हालांकि, इस समर्थन के बावजूद इजरायल में नई सरकार का गठन आसान नहीं दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने कहा है कि राजनीतिक दलों के बीच आपसी मतभेद और गठबंधन को लेकर असहमति के कारण अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कौन स्थिर सरकार बना सकता है।
गादी आइजेनकोट को मिला ज्यादा समर्थन
इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने सरकार गठन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। इन परामर्शों में 67 सांसदों ने गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश की, जबकि 46 सांसदों ने नेतन्याहू का समर्थन किया।
आइजेनकोट पूर्व सैन्य प्रमुख और यशर पार्टी के नेता हैं। उन्होंने नेतन्याहू के नेतृत्व को चुनौती देते हुए चुनाव में विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश की है।
नेतन्याहू की पार्टी सबसे बड़ी, फिर भी बहुमत से दूर
चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसके बावजूद उनके धार्मिक और राष्ट्रवादी गठबंधन को कुल 53 सीटें ही मिल सकीं। इजरायल की संसद में बहुमत के लिए 61 सीटों की आवश्यकता है।
दूसरी ओर, आइजेनकोट के नेतृत्व वाले नेतन्याहू विरोधी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं। वहीं, अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले दो राजनीतिक दलों ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं। इन दलों का समर्थन सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
नेतन्याहू के सहयोगी दल ने नहीं दिया समर्थन
नेतन्याहू को सबसे बड़ा झटका उनके पुराने सहयोगी दल यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (UTJ) से लगा है। इस दल ने राष्ट्रपति के सामने किसी भी उम्मीदवार को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की सिफारिश नहीं की।
वहीं, अरब नेतृत्व वाले दलों ने आइजेनकोट का समर्थन किया है। हालांकि, आइजेनकोट और नेतन्याहू दोनों ने अब तक अरब दलों के साथ सरकार बनाने को लेकर अनिच्छा जताई है। ऐसे में आइजेनकोट के सामने अपने समर्थकों को एकजुट रखते हुए स्थिर गठबंधन तैयार करने की बड़ी चुनौती है।
राष्ट्रपति रविवार को करेंगे फैसला
राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने कहा है कि वह राजनीतिक दलों के नेताओं से आगे भी बातचीत करेंगे। उन्होंने रविवार को सरकार बनाने के लिए उम्मीदवार को नामित करने की बात कही है।
राष्ट्रपति द्वारा नामित उम्मीदवार को सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय मिलेगा। जरूरत पड़ने पर इसमें 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी दी जा सकती है। यदि निर्धारित समय में सरकार नहीं बनती है तो इजरायल को फिर से चुनाव की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
क्या इजरायल में बदल जाएगा सत्ता का समीकरण?
गादी आइजेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिलना नेतन्याहू के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। हालांकि, समर्थन देने वाले सभी दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर सहमति बनना अभी बाकी है।
नेतन्याहू फिलहाल कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे। आने वाले दिनों में राष्ट्रपति का फैसला और गठबंधन की बातचीत तय करेगी कि इजरायल की सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी।