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फर्रुखाबाद में शहेजान मंसूरी 12 घंटे से पुलिस हिरासत में, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कर रहे थे प्रदर्शन

फर्रुखाबाद के टाउन हॉल पार्क में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शहेजान मंसूरी को पुलिस ने 9 अक्टूबर की रात हिरासत में ले लिया। 10 अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक उन्हें थाना मऊ दरवाजा में रखा गया था। पुलिस सुरक्षा और अनुमति का हवाला दे रही है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे आवाज दबाने की कार्रवाई बता रहे हैं।
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फर्रुखाबाद में शहेजान मंसूरी 12 घंटे से पुलिस हिरासत में, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कर रहे थे प्रदर्शन
थाना मऊदरवाजा में पुलिस हिरासत में मोहम्मद शहेजान मंसूरी
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INDC Network: फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश: जनपद फर्रुखाबाद के टाउन हॉल पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शहेजान मंसूरी को पुलिस ने 9 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे हिरासत में ले लिया। 10 अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक उन्हें थाना मऊ दरवाजा में रखा गया था। उनके समर्थकों के अनुसार, इस दौरान 12 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी उन्हें रिहा नहीं किया गया था।

पुलिस ने हिरासत में लेने के पीछे सुरक्षा का कारण बताया। पुलिस का कहना है कि रात के समय प्रदर्शन स्थल पर शहेजान मंसूरी के साथ कोई घटना हो सकती थी, जिसकी जिम्मेदारी पुलिस पर आती। पुलिस ने यह भी कहा कि आंदोलन करने के लिए अनुमति आवश्यक है।

शहेजान मंसूरी का कहना है कि उन्होंने पुलिस से निवेदन किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें थाने से जाने नहीं दिया गया। पुलिस की ओर से उन्हें बताया गया कि वे थाने में सुरक्षित हैं।

शहेजान मंसूरी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 13 करोड़ 37 लाख वोट काटे जाने के मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए उनके खिलाफ कड़ी राजनीतिक टिप्पणी भी की। शहेजान मंसूरी और उनके समर्थकों का आरोप है कि पुलिस ने उनका मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया और उनकी Instagram ID से कुछ वीडियो भी डिलीट किए गए। इस आरोप पर पुलिस का पक्ष सामने आया थानाध्यक्ष ने कहा भीड़ एकत्रित करने वाली अपील की वीडियो डिलीट की है।

आम आदमी पार्टी के फर्रुखाबाद जिलाध्यक्ष नीरज प्रताप शाक्य ने शहेजान मंसूरी को हिरासत में रखे जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। पुलिस यह गलत कर रही है।