पुलिस ने हिरासत में लेने के पीछे सुरक्षा का कारण बताया। पुलिस का कहना है कि रात के समय प्रदर्शन स्थल पर शहेजान मंसूरी के साथ कोई घटना हो सकती थी, जिसकी जिम्मेदारी पुलिस पर आती। पुलिस ने यह भी कहा कि आंदोलन करने के लिए अनुमति आवश्यक है।
शहेजान मंसूरी का कहना है कि उन्होंने पुलिस से निवेदन किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें थाने से जाने नहीं दिया गया। पुलिस की ओर से उन्हें बताया गया कि वे थाने में सुरक्षित हैं।
शहेजान मंसूरी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 13 करोड़ 37 लाख वोट काटे जाने के मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए उनके खिलाफ कड़ी राजनीतिक टिप्पणी भी की। शहेजान मंसूरी और उनके समर्थकों का आरोप है कि पुलिस ने उनका मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया और उनकी Instagram ID से कुछ वीडियो भी डिलीट किए गए। इस आरोप पर पुलिस का पक्ष सामने आया थानाध्यक्ष ने कहा भीड़ एकत्रित करने वाली अपील की वीडियो डिलीट की है।
आम आदमी पार्टी के फर्रुखाबाद जिलाध्यक्ष नीरज प्रताप शाक्य ने शहेजान मंसूरी को हिरासत में रखे जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। पुलिस यह गलत कर रही है।