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दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- रात 10 बजे भी सुरक्षित महसूस करें महिलाएं

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि महिलाएं रात 10 बजे भी सड़क, मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षित महसूस करें।
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दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- रात 10 बजे भी सुरक्षित महसूस करें महिलाएं
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सोमवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। जस्टिस जेबी पार्डीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में हर महिला को सुरक्षित महसूस होना चाहिए, चाहे वह रात 10 बजे सड़क पर चल रही हो या मेट्रो और सड़क मार्ग से यात्रा कर रही हो।

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-एनसीआर में हाल में सामने आए दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामलों से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा था। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रभावी कदम उठाने को कहा।

अदालत ने कहा कि पार्क, सड़क और बस जैसे सार्वजनिक स्थानों को महिलाओं के लिए जोखिम वाले क्षेत्र नहीं बनने दिया जा सकता। कोर्ट ने सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा और हिंसा से मुक्त जीवन के अधिकार से भी जोड़ा।

आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद दिल्ली के पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। दिल्ली विकास प्राधिकरण के सुरक्षा ऑडिट में 736 डीडीए पार्कों में से केवल 16 में सीसीटीवी कैमरे पाए गए। ऑडिट में 190 पार्कों को हाई-रिस्क और 520 पार्कों को अतिरिक्त रोशनी की जरूरत वाले स्थानों के रूप में चिन्हित किया गया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए बेहतर रोशनी, सीसीटीवी कैमरे और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के बजाय सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।