INDC Network : औरैया,उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के औरैया जिले की नगर पंचायत बिधूना इन दिनों गंभीर विवाद का केंद्र बन गई है। वार्ड संख्या 14 की सभासद पूजा शाक्य ने नगर पंचायत अध्यक्ष आदर्श कुमार मिश्रा पर अभद्र व्यवहार और वार्ड की उपेक्षा का आरोप लगाया है। इस प्रकरण ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और स्थानीय राजनीति को चर्चा में ला दिया है।
सभासद पूजा शाक्य ने प्रेस के माध्यम से बताया कि उनके पति अंकुश शाक्य नगर पंचायत में बाढ़ से जुड़े कार्यों की देखरेख करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 अगस्त 2025 को जब एससी-एसटी आयोग के सदस्य रामचंद्र रमेश चंद्र कुंड बिधूना में मौजूद थे, तब उनके पति ने बोर्ड बैठकों को लेकर सवाल उठाया। उनका कहना था कि नगर पालिका एक्ट के अनुसार प्रतिमाह बैठक आयोजित की जानी चाहिए, लेकिन पिछले ढाई सालों में मात्र आठ–नौ बैठकें ही बुलाई गईं।
सभासद के अनुसार, इस सवाल पर नगर पंचायत अध्यक्ष आदर्श मिश्रा आपा खो बैठे और आयोग सदस्य, अधिशासी अधिकारी तथा कर्मचारियों के सामने उनके पति के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। आरोप यह भी लगाया गया कि अध्यक्ष ने यह तक कह दिया कि “अगर ज्यादा बैठकें निकालोगे तो सबके सामने उठक-बैठक लगवाऊंगा।”
पूजा शाक्य का कहना है कि इस व्यवहार से उनके पति को मानसिक और सामाजिक रूप से ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि सभासद के दायित्व और लोकतांत्रिक अधिकारों की भी अवहेलना है।
सभासद ने यह भी आरोप लगाया कि उनके वार्ड की लगातार उपेक्षा की गई है। उन्होंने दावा किया कि पिछले ढाई साल के कार्यकाल में वार्ड संख्या 14 में न तो कोई विकास कार्य हुआ और न ही सड़कों पर लाइट लगाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि नगर पंचायत के कुछ कर्मचारी भी उनके पति के साथ अपमानजनक व्यवहार करने में शामिल रहे।
पूजा शाक्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अब इस स्थिति से बेहद आहत हैं। यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह अपने पद से इस्तीफा देने को मजबूर हो जाएंगी। साथ ही, उन्होंने जिलाधिकारी औरैया से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
यह मामला बिधूना नगर पंचायत की आंतरिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। जहां एक ओर सभासदों का आरोप है कि विकास कार्यों की उपेक्षा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर अध्यक्ष पर व्यक्तिगत अभद्रता और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप भी सामने आया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्ड संख्या 14 की स्थिति वास्तव में बदहाल है और वहां विकास कार्यों की कमी साफ देखी जा सकती है। यह विवाद अब प्रशासन के लिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यदि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई, तो स्थानीय राजनीति में असंतोष और गहरा सकता है।
इस विवाद के सामने आने के बाद नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी औरैया इस पूरे प्रकरण को किस तरह से संभालते हैं और क्या सभासद पूजा शाक्य के आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं।



















