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22 डिग्री हेलो: आसमान में दिखने वाला अद्भुत प्रकाशीय घेरा, जानिए कैसे बनता है यह दुर्लभ दृश्य

INDC Network : विज्ञान : आसमान में दिखाई देने वाली कई प्राकृतिक घटनाएं लोगों को आश्चर्यचकित कर देती हैं। ऐसी ही एक रोचक और आकर्षक घटना है 22 डिग्री हेलो (22-Degree Halo)। जब सूर्य या चंद्रमा के चारों ओर एक बड़ा गोलाकार चमकदार घेरा दिखाई देता है, तो लोग अक्सर इसे इंद्रधनुष, दिव्य संकेत या किसी खगोलीय रहस्य से जोड़ देते हैं। हालांकि विज्ञान इसके पीछे एक स्पष्ट और दिलचस्प कारण बताता है।

हाल ही में देश के कई हिस्सों में लोगों ने सूर्य के चारों ओर एक विशाल प्रकाशीय वलय देखा। इस दुर्लभ दृश्य की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। विशेषज्ञों ने इसे 22 डिग्री हेलो की घटना बताया।

क्या होता है 22 डिग्री हेलो?

22 डिग्री हेलो एक ऑप्टिकल या प्रकाशीय घटना है, जो सूर्य या चंद्रमा के चारों ओर लगभग 22 डिग्री की दूरी पर एक चमकदार वृत्त के रूप में दिखाई देती है। यह घेरा सामान्यतः सफेद या हल्के रंगों वाला होता है, जबकि इसके किनारों पर हल्की लाल और नीली आभा भी देखी जा सकती है। इस घटना का नाम “22 डिग्री हेलो” इसलिए पड़ा क्योंकि यह घेरा सूर्य या चंद्रमा से लगभग 22 डिग्री के कोण पर बनता है।

कैसे बनता है यह प्रकाशीय घेरा?

वायुमंडल की ऊपरी परतों में अक्सर सिरस (Cirrus) और सिरोस्ट्रेटस (Cirrostratus) नामक पतले बादल मौजूद रहते हैं। इन बादलों में असंख्य सूक्ष्म षट्कोणीय (Hexagonal) बर्फ के क्रिस्टल होते हैं। जब सूर्य का प्रकाश इन बर्फीले क्रिस्टलों से होकर गुजरता है, तो प्रकाश अपवर्तित (Refraction) होकर विभिन्न दिशाओं में मुड़ जाता है। लाखों क्रिस्टलों से गुजरने वाली किरणें मिलकर आकाश में एक गोलाकार चमकदार घेरा बना देती हैं। यही 22 डिग्री हेलो कहलाता है।

क्या यह इंद्रधनुष से अलग है?

कई लोग 22 डिग्री हेलो को इंद्रधनुष समझ लेते हैं, लेकिन दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं। इंद्रधनुष पानी की बूंदों में प्रकाश के परावर्तन और अपवर्तन से बनता है, जबकि 22 डिग्री हेलो बर्फ के क्रिस्टलों में प्रकाश के अपवर्तन से बनता है। इसके अलावा इंद्रधनुष आमतौर पर सूर्य के विपरीत दिशा में दिखाई देता है, जबकि हेलो सीधे सूर्य या चंद्रमा के चारों ओर बनता है।

मौसम से क्या है इसका संबंध?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 22 डिग्री हेलो का दिखाई देना कई बार मौसम में बदलाव का संकेत हो सकता है। सिरोस्ट्रेटस बादल अक्सर किसी बड़े मौसम तंत्र या पश्चिमी विक्षोभ के आने से पहले बनते हैं। इसलिए हेलो दिखाई देने के बाद अगले 24 से 48 घंटों में बादल बढ़ने, बारिश होने या मौसम में परिवर्तन की संभावना बन सकती है। हालांकि हर बार हेलो का दिखाई देना बारिश की गारंटी नहीं होता, लेकिन इसे मौसम संबंधी संकेतों में शामिल किया जाता है।

दिन और रात दोनों में दिख सकता है हेलो

यह रोचक घटना केवल सूर्य के आसपास ही नहीं, बल्कि चंद्रमा के चारों ओर भी देखी जा सकती है। रात में जब चंद्रमा पर्याप्त चमकीला होता है और वातावरण में बर्फीले क्रिस्टल मौजूद होते हैं, तब लूनर हेलो (Lunar Halo) बनता है। यह दृश्य और भी अधिक रहस्यमय तथा आकर्षक दिखाई देता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना

22 डिग्री हेलो केवल एक सुंदर प्राकृतिक दृश्य नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी के वायुमंडल, बादलों की संरचना और प्रकाश के व्यवहार को समझने में भी वैज्ञानिकों की सहायता करता है। यह घटना प्रकृति और विज्ञान के अद्भुत मेल का एक शानदार उदाहरण मानी जाती है।

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